एक हादसे में गवां दिए थे हाथ; फिर भी पूरे किए सपने

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Updated on 15 Jan, 2016 at 9:32 pm

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एक लड़का जो क्रिकेट खेलता है, ये सुनना आपके लिए एक आम बात है। लेकिन दोनों हाथ न होने के बावजूद भी वह क्रिकेट खेलता है, यह कहीं से भी आम नहीं है। हम बात कर रहे है कश्मीर के क्रिकेटर आमिर अहमद लोन की।

आमिर अहमद लोन एक ऐसा नाम, जिसने अपने हौसलों को ज़िंदा रखा। 10 साल पहले एक हादसे में आरा मशीन के पास खेल रहे आमिर के दोनों हाथ मशीन की चपेट में आ गए। जब यह हादसा हुआ उस वक़्त आमिर तीसरी क्लास में पढ़ता था। इस हादसे में आमिर के दोनों हाथ बाजुओं से अलग हो गए। करीबन तीन साल तक आमिर का इलाज चला।

इलाज़ के बाद जब आमिर स्कूल जाने लगा, तो कई तरह की परेशानियों का सामना उसे करना पड़ा। शिक्षक कहते थे कि तुम्हारे हाथ नहीं हैं। बिना हाथों के तुम कुछ नहीं कर सकते, इसलिए तुम घर पर रहो। आमिर बताते हैंः


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“मैं क्लास में लिख नहीं पाता था। कोई और मेरे लिए लिखता था। कुछ दिनों बाद दूसरे बच्चे मेरी मदद से इनकार करने लगे। ऐसे में या तो मैं पढ़ाई छोड़कर घर बैठ जाता या खुद कोई रास्ता निकालता। एक दिन रास्ते से पेन खरीदा और घर पर ही पैरों से लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में मैं पैरों से लिखने लगा।”

क्रिकट का शौक आमिर को पहले से ही था। दोनों हाथ गंवाने के बाद भी आमिर ने क्रिकेट की प्रैक्टिस जारी रखी। गर्दन से बल्ला पकड़ा और अभ्यास में जुट गए। इसी तरह पैरों से गेंदबाजी करने का अभ्यास करते रहे। धीरे-धीरे उनकी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में परिपक्वता आने लगी। अब आलम यह है कि मैदान पर अपनी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी के जलवों से वह हजारों की भीड़ को बांध लेते हैं।

आमिर के घर टीवी नहीं था। आमिर की क्रिकेट को लेकर ऐसी दीवानगी थी कि वह पड़ोसियों के घर जाकर मैच देखता था। आमिर ने अपने क्रिकेट के जुनून को कायम रखा और पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा।

और सबसे बड़ी बात आमिर के पिता ने अपने बच्चे के सपनों को सच करने में हर कदम पर उसका साथ दिया। गरीब पिता ने अपनी दुकान की मशीनें बेचकर आमिर के सपनों को उड़ान दी।

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