सिखों के दसवें गुरू गोबिन्द सिंह के बारे में ये 14 बातें आप शायद ही जानते हों।

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Updated on 22 Dec, 2015 at 12:56 pm

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आज सिखों के दसवें गुरू गोबिन्द सिंह  की जयन्ती है। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। गुरू गोबिन्द सिंह भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे। हम यहां उनके जीवन से जुड़ी उन 14 जानकारियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको शायद नहीं पता होगा।

1. गुरू गोबिन्द सिंह का जन्म गुरू तेग बहादुर के घर पटना शहर में हुआ था।

2. पिता तेग बहादुर की मृत्यु के बाद वह 11 नवम्बर 1675 को सिखों के दसवें गुरू बने।

3. उन्होंने वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पन्थ की स्थापना की थी। यह सिखों के इतिहास की एक महत्वपूर्ण परिघटना है।

4. गुरू गोबिन्द सिंह ने सिखों के पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा करने का बीड़ा उठाया और इस काम को सम्पन्न किया।

5. वह न केवल एक योद्धा, बल्कि एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे।

6. उनके जीवन की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत विचित्र नाटक है। इसे गुरू गोबिन्द सिंह की आत्मकथा भी कहा जाता है।

7. यह दरअसल, दसम ग्रन्थ का एक हिस्सा है। दसम ग्रन्थ, गुरू गोबिन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम है।

8. गुरू गोबिन्द सिंह ने अपने जीवन काल में मुगलों और उनके सहयोगियों के खिलाफ 14 युद्ध लड़े।

9. अपने अदम्य साहस की वजह से मुगल बादशाह औरंगजेब के मन में उन्होंने एक खौफ पैदा कर दिया था।

10. उन्हें ‘सरबंसदानी’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने धर्म के लिए समस्त परिवार का बलिदान दे दिया।

11. इसके अलावा उन्हें कलगीधर, दशमेश, बाजांवाले आदि कई उपनामों से विभूषित किया गया था।

12. उनके दरबार में विद्वतजनों को संरक्षा मिलती थी, इसलिए वह संत सिपाही भी कहलाए।

13. वर्ष 1677 में उनका विवाह सुंदरी जी से हुआ।

14. उनके चार पुत्र साहिबज़ादा अजीत सिंह, जूझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह थे ।

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