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गुजरात में कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

Published on 2 August, 2016 at 1:18 pm By

आनंदीबेन पटेल के पद से इस्तीफा देने के बाद गुजरात का नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इस बात पर स्थिति अब भी साफ नहीं है। हालांकि, माना जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों में नए मुख्यमंत्री का ऐलान कर दिया जाएगा।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को गुजरात में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।


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हाल के दिनों में गुजरात में पटेल आंदोलन और दलित मुद्दे पर चल रही उठा-पटक की वजह से भाजपा का जनाधार खिसका है। यही वजह है कि पार्टी अब यहां किसी ऐसे चेहरे की तलाश है जो भाजपा के रुतबे को कायम रख सके।

मुख्यमंत्री पद की रेस में भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का नाम सबसे ऊपर है, लेकिन कई और ऐसे चेहरे हैं, जो इस पद के दावेदार माने जाते हैं।

गुजरात भाजपा के अध्यक्ष विजय रुपानी के बारे में भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद का दायित्व वह संभाल सकते हैं। संगठन पर रुपानी की अच्छी पकड़ है। रुपानी को राज्य में पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी उस वक्त दी गई थी, जब आनंदीबेन पटेल पाटीदार आंदोलन की वजह से संकट में थीं। रुपानी को सरकार में भी रहने का भी अनुभव है। वह फिलहाल गुजरात सरकार में परिवहन मंत्री हैं।

मुख्यमंत्री पद की दौर में रुपानी के बने होने की तमाम वजहों में एक वजह यह भी है कि वे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के करीबियों में हैं। संगठन और सरकार के बीच उनके समन्वय की चर्चा होती है। रुपानी के मुख्यमंत्री बनने में एक पेंच यह भी है कि वे पाटीदार समुदाय से नहीं आते हैं। इसलिए ऐसा मानने वालों की भी कोई कमी नहीं है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा। इससे पार्टी पाटीदार वोट खो सकती है।

चर्चा यह भी है कि पाटीदार वोट को एकजुट रखने के लिए भाजपा नितिन पटेल का नाम आगे कर सकती है।



नितिन को लंबे समय तक सरकार में रहने का अनुभव है। खास बात यह है कि वह नरेन्द्र मोदी के करीबियों में से एक हैं। मोदी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे, उस वक्त नितिन पटेल उनके साथ काम कर चुके हैं।

हालांकि, हाल में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान नितिन पटेल की एक नहीं चली थी। वह हासिए पर चले गए। इसलिए राजनीतिक गलियारों में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नितिन पटेल राज्य में भाजपा की विरासत संभाल सकते हैं।

आनंदीबेन के उत्तराधिकारी के रूप में भीखू दलसानिया का नाम भी सामने आ रहा है।

भीखू न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीब हैं, बल्कि उनकी संगठन पर भी अच्छी पकड़ है। मीडिया के लाइम-लाइट से दूर रहने वाले भीखू चुपचाप काम करना पसंद करते हैं। उनकी छवि बेहतर है।

चर्चा यह भी है कि पुरुषोत्तम रुपाला को आनंदीबेन की सीट मिल सकती है।


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उन्हें हाल ही में राज्यसभा भेजा गया है, साथ ही वह केन्द्र में भी मंत्री हैं। इसलिए यह कहना दूर की कौरी होगी कि वह गुजरात में वापसी कर सकते हैं।

एक और नाम है सौरभ पटेल का।


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वह एक अच्छे नेता हैं, लेकिन अंबानी परिवार से करीबी उनके लिए फांस बन सकती है। आम आदमी पार्टी का अंबानी विरोध किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में सौरभ पटेल को मुख्यमंत्री बनाए जाने से भाजपा को नुकसान तय है।

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