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10 सर्वश्रेष्ठ भारतीय आध्यात्मिक गुरू

Updated on 10 September, 2015 at 5:57 pm By

भारत हमेशा से ही आध्यात्म की धरती रहा है। यहां आध्यात्मिकता की लंबी परम्परा रही है। समय-समय पर इस देश में कई ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक गुरू हुए, जिन्होंने लोगों को ध्यान और आंतरिक शांति के पथ पर आगे बढ़ने को प्रेरित किया। इन्हीं गुरुओं ने दुनिया भर के लोगों को योग और ध्यान के माध्यम से सर्वोच्च सत्ता से संवाद करना सिखाया, जिससे वे स्वस्थ और सुखी जीवन जी सकें। हम यहां उन 10 बड़े भारतीय आध्यात्मिक गुरुओं का जिक्र करने जा रहे हैं, जिनका समाज और लोगों के हितों की रक्षा में अमूल्य योगदान है। इन गुरुओं के शिष्यों की संख्या हजारों-लाखों में है, जो उन्हें ईश्वर के दूत के रूप में देखते हैं।

1. स्वामी विवेकानंद


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स्वामी विवेकानंद का जन्म वर्ष 1863 में कोलकाता में हुआ था। अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस के निर्देशन में युवा विवेकानंद ने ईश्वर की खोज में अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी। वह वेदान्त के समर्थक थे। उन्होंने लोगों को बताया कि मानवता की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो विश्व धर्म संसद में जाकर हिन्दुत्व और वेदान्त के सिद्धान्तों का परिचय पूरी दुनिया से कराया था।

2. स्वामी राम

स्वामी जी वह प्रथम व्यक्ति थे, जिन्होंने योग का परिचय आधुनिक संस्कृति से कराया था। अमेरिका स्थित मेनिंगर क्लिनिक में अपनी पढ़ाई के दौरान स्वामी राम ध्यान के माध्यम से न केवल अपने हृदय की धड़कनों पर नियन्त्रण कर लेते थे, बल्कि देह का तापमान और रक्तचाप पर भी उनका खासा नियन्त्रण था। बाद में उन्होंने हिमालयन इन्सटीट्यूट ऑफ योगा साइन्स एंड फिलॉसोफी की स्थापना की। इस संस्थान का मुख्य उद्येश्य ध्यान के माध्यम से जन-साधारण को फिट रखना था।

 

3. ओशो

ओशो ने हर एक पाखंड पर चोट की। वह मुखर और स्पष्टवादी थे। इसी बात ने संभवतः उन्हें बागी और विवादास्पद गुरू बना दिया। ओशो के भक्त लाखों की संख्या में दुनिया भर में मौजूद हैं। इस संसार से विदा लेने के बावजूद उनको लेकर भक्तों में उत्सुकता है और लोग उनके बताए रास्तों पर चलना चाहते हैं।


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4. जे. कृष्णमूर्ति

बाल्यकाल में ही जे. कृष्णमूर्ति के बारे में भविष्यवाणी कर दी गई थी कि यह बालक एक दिन दुनिया को शिक्षित करेगा। यही वजह है कि उन्हें और उनके भाई को भविष्यवाणी करने वाले संगठन थियोसोफिकल सोसायटी ने अल्प-आयु में ही गोद ले लिया था। उन्हें बाद में ऑर्डर ऑफ द ईस्ट नामक नए संगठन की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन कृष्णमूर्ति ने सबको आश्चर्यचकित करते हुए अपना पद छोड़ दिया और दुनिया की यात्रा पर निकल पड़े। इस दौरान उन्होंने अनगिनत किताबें लिखीं और अनगिनत स्थानों पर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कभी जटिल धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं और परिकल्पित दर्शन जैसे विषयों को नहीं छूआ। लेकिन उन्होंने आम जन-जीवन में व्याप्त उन जटिलताओं पर बात करना उचित समझा, जिनसे हमारा सामना प्रतिदिन होता है।

 

5. श्री श्री रविशंकर

श्री श्री रविशंकर सर्वकालिक लोकप्रिय और महान गुरुओं में से एक हैं। आर्ट ऑफ लिविंग कोर्स के संस्थापक रविशंकर के शिष्य दुनिया भर में फैले हुए हैं। इस कोर्स के माध्यम से रविशंकर लोगों को यह सिखाते हैं कि संतुष्टि कैसे हासिल की जाए। उन्होंने अब तक सैकड़ों लोगों के अंतर्मन को छूकर उनकी जिन्दगियां बदल डाली हैं। आध्यात्म के क्षेत्र में अपने अभूूतपूर्व योगदान और प्रसिद्धि की वजह से भारत के प्रभावशाली गुरूओं की सूची में वह पांचवें स्थान पर हैं।

 

6. बाबा रामदेव



भारतीय आध्यात्म के पटल पर बाबा रामदेव एक नए नक्षत्र हैं। पिछले कुछ सालों में ही उनका त्वरित उत्कर्ष प्रेरणादायक है। न केवल भारत में अपितु दुनियाभर में उनके लाखों शिष्य मौजूद हैं, जो समाज को योग के माध्यम से ऊर्जावान बनाने का काम कर रहे हैं। किसान परिवार में जन्में बाबा रामदेव अपने योग-आसनों की वजह से जाने जाते हैं। उन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया है कि वे आगे बढ़कर योग को अपनाएं और एक स्वस्थ और सुखी जीवन जीएं।

 

7. दादी जानकी

ब्रह्मकुमारी एक आध्यात्मिक विद्यालय है जो राज योग की शिक्षा देती है। यह भारत में नया धार्मिक आन्दोलन है जो महिला-केन्द्रित है। इस आन्दोलन की प्रणेता दादी जानकी का कहना है कि भगवान शिव मानवता के ईश्वर हैं। वह कहती हैं कि सर्वोच्च सत्ता के संवाद के लिए अपने हृदय को उनसे जोड़ने की जरूरत है।

 

8. श्री रामकृष्ण परमहंस

श्री रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिकता की कई कहानियां हैं। वह भगवती काली के अनन्य भक्त थे। यही नहीं, स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक आरोहण की वजह भी वही थे। गुरू परमहंस लंबी समाधियों में लीन रहा करते थे। बचपन में उनका नाम गदाधर था। जब वह बड़े हुए तो रामकृष्ण परमहंस कहलाए। उनके प्रशंसकों में न केवल देशी बल्कि विदेशी भी थे। नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार रोमेन रोलैन्ड ने उनके संबंध में कई व्यापक टिप्पणियां की थीं।

 

9. माता अमृतानंदमयी

माता अमृतानंदमयी गले लगाने वाली अम्मा के रूप में ज्यादा प्रचलित हैं। माना जाता है कि उनके 10 लाख से अधिक अनुयायी हैं। कहा जाता है कि माता अमृतानंदमयी देश की सबसे अमीर आध्यात्मिक गुरू हैं। कोच्ची, कोल्लम, मैसूर, बेंगलूर और कोयम्बटूर जैसे शहरों के अलावा अन्य कई शहरों में भी उन्होंने कई सारे स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का निर्माण करवाया है। वह आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति का संदेश देती हैं।

 

10. सत्य सांई बाबा

सत्य सांई बाबा को शिरडी वाले सांई बाबा का अवतार कहा जाता है। सत्य सांई अपने अनुयायियों में बेहद प्रसिद्ध हैं। उनका यह मानना रहा है कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। सत्य सांई हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अनुयायियों की संख्या अब भी लाखों में है। वे पूरी दुनिया में फैले हुए हैं।

 


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