ग्रेट बैरियर रीफ़ में मिले रहस्यमयी गड्ढे का क्या मतलब है?

Updated on 3 Nov, 2017 at 11:48 am

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ग्रेट बैरियर रीफ़ में एक नीला गड्ढा मिला है। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड तट पर 2,300 किलोमीटर में फैले ग्रेट बैरियर रीफ में  मिले नीले गड्ढे से विशेषज्ञों ने स्वस्थ मूंगा निकालने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिक समुदाय इससे खासा उत्साहित है। हालांकि, इस गड्ढे का क्या मतलब है, इसका पता नहीं चल सका है।

कोरल-सी में यह दुनिया का सबसे बड़ा रीफ सिस्टम है, जिसमें 2,900 चट्टान और 940 आइलैंड शामिल हैं। रीफ के एक बड़े हिस्से को ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क के माध्यम से संरक्षित रखा गया है। समुद्री जीव-विज्ञानी जॉनी गस्केल ने इसकी तस्वीर को इन्स्टाग्राम पर पोस्ट की है। इससे पहले इस साल के शुरू में कहा गया था कि यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल दुनिया की सबसे बड़ी मूंगे की चट्टान ग्रेट बैरियर रीफ को ब्लीचिंग से जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। ऑस्ट्रेलिया स्थित इस मूंगे की चट्टान का करीब 1,500 किमी क्षेत्र यानी दो तिहाई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।

फिलहाल इस गड्ढे के बारे में कहा जा रहा है कि यह बेलिज़ में स्थित प्रसिद्ध ग्रेट ब्लू होल से भी बड़ा है।

ग्रेट बैरियर रीफ में मछलियों की 1,500 प्रजाति, 411 तरह के सख्त मूंगे और 134 तरह की प्रजाति की शार्क मछलियां पाई जाती हैं। दुनिया का एक-तिहाई मुलायम मूंगा यहीं पर मिलता है। साथ ही समुद्री कछुए की सात दुर्लभ प्रजातियां, 30 तरह के समुद्री स्तनधारी जीव सहित 630 प्रजाति की शूलचर्मी जैसे स्टारफिश और समुद्री अर्चिन का यह निवास है।


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इतना ही नहीं, रीफ में चिड़ियों की 215 प्रजातियां, हजारों किस्म के स्पंज, कीड़े और क्रसटेशियन के साथ ही यहां सी-बर्ड भी पाए जाते हैं। ग्रेट बैरियर रीफ को यूनेस्को ने 1981 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था।

साथ ही सीएनएन ने इसे दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया है।

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