क्या पॉर्न साइट्स बैन करने से रेप के मामले रुक जाएंगे, देश में सेक्स एजुकेशन क्यों नहीं दी जाती?

Updated on 30 Oct, 2018 at 5:06 pm

Advertisement

इंटरनेट से लेकर टीवी पर ऐसे कंटेंट की भरमार है, जो अश्लील की केटेगरी में आते हैं। पॉर्न साइट्स भी इन्हीं में से एक है और हाल ही में केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (आईएसपी) को अश्लील कंटेंट दिखाने वाली 827 वेबसाइटों को बंद करने का निर्देश दे दिया है। लेकिन सवाल ये है क्या ऐसा करने से रेप के मामले रुक जाएंगे?

 

 

सरकार ने 2015 में भी एक नोटिफिकेशन जारी करके कंपनियों से पॉर्न साइट्स बंद करने को कहा था, मगर उस पर कोई अमल नहीं हुआ।इस बार भी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 827 वेबसाइट्स को बंद करने को कहा है। आज तो ये साइट्स बंद हो जाएगी लेकिन कल भतेरी साइट्स और पैदा हो जाएंगी। वैसे भी आज के डिजीटल दौर में अश्लील कंटेंट तक पहुंच को रोक पाना लगभग नामुमकिन है।

 


Advertisement

 

दूरसंचार विभाग ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को आदेश दिया है जिसमें कहा गया है सभी लाइसेंस प्राप्त इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों को हाईकोर्ट के आदेश का पालन और मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक 827 वेबसाइटों को बंद करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

 

 

सवाल ये उठता है क्या पॉर्न साइट्स बंद कर देने से रेप रुक जाएंगे? क्या पुरुषों की बीमार मानसिकता ठीक हो जाएगी? क्या महिलाओं के प्रति उनकी सोच बदल जाएगी? सरकार पॉर्न साइट्स बंद कर रही है, मगर स्कूल में सेक्स एजुकेशन को अभी तक अनिवार्य नहीं कर रही, जो आज के दौर की ज़रूरत है। बढ़ती उम्र के बच्चे अपनी यौन जिज्ञासाओं के चलते कई बार गलत राह पर चल पड़ते हैं, क्योंकि उन्हें ज़रूरी सेक्स एजुकेशन नहीं मिलती। हमारे देश में सेक्स पर बात करना जैसे हाय-तौबा, हाय-तौबा हो जाता है।

बुरी चीज़ों को दूर रखना ठीक है, लेकिन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है लोगों को अच्छी और बुरी चीज़ों का फ़र्क समझाया जाए और ये सही सेक्स एजुकेशन से ही संभव है। पॉर्न साइट्स बंद करने का आदेश देने की बजाय अगर अदालत सभी के लिए सेक्स एजुकेशन को अनिवार्य करने का आदेश दें तो शायद अच्छी दिशा में बदलाव हो।

Advertisement
Tags

    आपके विचार


    • Advertisement