प्रथम विश्व युद्ध में जीत के लिए ब्रिटिश सरकार ने इस मंदिर में कराई थी पूजा

Updated on 16 Apr, 2018 at 11:20 pm

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स्वर्ण मंदिर धर्म और आस्था का प्रतीक है। प्रतिवर्ष यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु जाते हैं और अपना मत्था टेकते हैं। हालांकि, धर्मस्थली स्वर्ण मंदिर जुड़ी कुछ बातें ऐसी हैं, जिनसे शायद आप अनजान हो सकते हैं। तो चलिए सिखों के गौरवमयी इतिहास का परिचायक रहे इस मंदिर के कुछ खास फैक्ट्स के बारे में आपको बताते हैं।

 

हरमिंदर साहिब  की  नींव सूफी संत साईं मियां मीर द्वारा रखी गई थी। शुरुआत से ही साईं मियां मीर का झुकाव सिख धर्म की ओर था।

 

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स्वर्ण मंदिर की स्थापना  के लिए मुगल शासक अकबर ने जमीन दान की थी।

 

 

19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने स्वर्ण मंदिर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। लगभग दो शताब्दी के बाद महाराजा रंजीत सिंह ने दोबारा मंदिर का निर्माण कर उसपर सोने की परत चढ़वाई थीं।

 

 

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने जीत के लिए मंदिर में करवाया था अखंड पाठ ।

स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने के लिए चार द्वार बने हुए हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि किसी भी समुदाय और धर्म का व्यक्ति गुरु के द्वार में आ सकता है।

 



 

 

स्वर्ण मंदिर में हर रोज हजारों लोगों के लिए लंगर बनाया जाता है। यहां लगभग 10 हजार लोग हर रोज लंगर में प्रसाद खाते हैं।

 

 

1983 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर काफी चर्चा में रहा था। मंदिर पर अलगाववादियों ने कब्जा कर रखा था।

 

 

स्वर्ण मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक हालिया रिपोर्ट में इस मंदिर को दुनिया का सबसे ज्यादा देखे जाने वाला धर्मिक स्थल घोषित किया गया है।

 

 


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