कुषाण वंश ने जारी किया था पहला सोने का सिक्का, इस पर अंकित थी शिव और नंदी की प्रतिमा

Updated on 16 Sep, 2017 at 6:38 pm

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दीपावली पर आप भी सोने के सिक्के तो खरीदते ही होंगे , लेकिन क्या आपको पता है कि सबसे पहले सोने के सिक्के कब बने थे? दरअसल, आज से करीब दो हजार साल से भी पहले भारत में सोने के सिक्कों की शुरुआत हुई थी। दूसरी सदी के उत्तरार्ध में कुषाण वंश के शासनकाल के दौरान सोने के सिक्के जारी किए गए थे, जिन पर भगवान शिव और नंदी की प्रतिमा अंकित थी।

ये सिक्के कुषाण वंश के राजा वासुदेव प्रथम के शासनकाल में जारी किए गए थे।

राजा हुविष्क के बाद वासुदेव कुषाण साम्राज्य का स्वामी बने। माना जाता है कि राजा वासुदेव शिव के अनन्य भक्त थे। यही वजह है कि उनके समय में जारी सिक्कों पर शिव, त्रिशूल और नंदी की प्रतिमाएं अंकित थीं। उस समय के सिक्कों पर यवनों आदि के विदेशी देवताओं के कोई चित्र अंकित नहीं थी। इससे पता चलता है कि राजा वासुदेव ने प्राचीन हिन्दू धर्म को पूर्ण रूप से अपना लिया था। उनका वासुदेव नाम भी इसी बात का प्रमाण है।

राजा वासुदेव प्रथम को कुषाण वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक कहा जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि राजा वासुदेव के शासन काल में कुषाण साम्राज्य की शक्ति क्षीण होनी शुरू हो गई थी। इस समय कई ऐसी राजशक्तियों उदय हुआ  जिन्होंने कुषाणों के गौरव का अन्त कर अपनी शक्ति का विकास किया था। राजा हुविष्क के शासन काल में ही दक्षिणापथ में शकों ने एक बार फिर अपना उत्कर्ष किया था।

कुषाण वंश के राजाओं के चीनी राजाओं के साथ अच्छे संबंध रहे थे। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, वासुदेव प्रथम ने तीसरी सदी में चीनी राजा काओ रुई व वेइ को उपहार भेजे थे। चीनी अभिलेखों में वासुदेव प्रथम का उल्लेख है। वह संभवतः अंतिम कुषाण राजा था, जिनके चीन के साथ बेहतर संबंध थे। इस वंश के बाद के राजाओं के चीन के साथ संबंध खास नहीं रहे थे।


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