गोवा में अब नहीं हो सकेंगी बिंदास पार्टियां, लगने वाली है पाबंदी

Updated on 19 Sep, 2017 at 6:20 pm

गोवा घुमक्कड़ी, बिंदास पार्टियों और धूम-धड़ाकों के लिए जाना जाता रहा है। यहां आने वाले हिप्पियों और उनकी खुलेआम होने वाली रेव पार्टीज गोवा की पहचान बन चुकी है। हालांकि, अब सरकार यहां कुछ पाबंदियों लगाने पर विचार कर रही है, जिससे पर्यटकों को परेशानी हो सकती है।

गोवा में शराब के खुलेआम सेवन पर रोक लग सकती है। मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर शराब के सेवन पर रोक लगाने का निर्णय किया गया है। अगले महीने इस बावत सूचना जारी कर दी जाएगी। ऐसे में यहां आने वाले हिप्पियों और उनकी खुलेआम पार्टियों पर पाबंदी लग सकती है। मस्तमौले, बेफिकर टूरिस्ट अब थोड़े कम देखने को मिल सकते हैं।

गौरतलब है कि गोवा सरकार ने एक्साइज ड्यूटी ऐक्ट, 1964 में संशोधन किया था। इसके अनुसार राज्य के कुछ स्थानों को ‘नो अल्कोहल जोन’ बनाया गया था। इन स्थानों पर शराब पीने से जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही पुलिस द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन को रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया था। नियमों को तोड़ने के लिए कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की गई थी।

मुख्यमंत्री पर्रिकर ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के अधिकारियों के साथ अगले 15 दिनों के भीतर बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शराब की दुकानों के आसपास भी शराब सेवन पर पाबंदी होगी। दुकान के आसपास शराब पीने की अनुमति देने पर शराब विक्रेताओं पर भी कार्रवाई हो सकती है। उनका कहना था कि सार्वजनिक जगह पर शराब पीने और बोतलों को तोड़ने से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

खुली पार्टियों का दौर 70-80 के दशक से शुरू हुआ तब डीजे के बदले लोग म्यूजिक बजाते थे। हिप्पियों के लिए फेमस अंजुना बीच पर कई तरह के सामान बिकते थे, जो पर्यटकों के जरूरत के लिए होते थे। हिप्पियों के आने के बाद से गोवा में फुल मून पार्टियों का दौर शुरू हो गया था। वे समुद्र किनारे चमकीली रेत पर ड्रग्स के तड़के के साथ पार्टियां करते थे। दरअसल, हिप्पी मूल रूप से वेस्टर्न कंट्रीज के यंगस्टर्स द्वारा चलाया गया एक मूवमेंट था। ये लोग खूब नशा करते और पार्टियां करते थे। इनमें ज्यादातर अंग्रेज और यूरोपियन लोग शामिल होते थे। ये आज भी गोवा में देखे जा सकते हैं। सरकार के नए नियम से इन पर शिकंजा कसेगा।

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