भारत की 11 वर्षीया गीतांजली बन गई है ‘अमेरिका की टॉप यंग साइंटिस्ट’

Updated on 3 Nov, 2017 at 6:03 pm

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भारतीय मूल की 11 वर्षीया गीतांजली राव को ‘America’s Top Young Scientist’ खिताब से नवाजा गया है। गीतांजली ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जिससे पानी में शीशा का पता लगाया जा सकता है। इस डिवाइस से दूषित पानी के बारे में जानने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि गीतांजली को इस अमेरिका की टॉप यंग साइंटिस्ट सम्मान से नवाजा गया है।

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अमेरिका की टॉप यंग साइंटिस्ट सम्मान ग्रहण करती गीतांजली।

गीतांजली ने इस पर करीब दो साल पहले काम करना शुरू किया था। मिशिगन के फ्लिंट नदी में दूषित पानी को लेकर काफी समस्याएं थीं। हालांकि, गीतांजली ने अपने शोध में पता लगाया कि पानी में शीशा की समस्या सिर्फ फ्लिन्ट में नहीं थी, बल्कि हजारों ऐसे स्त्रोत हैं, जहां पानी में शीशा विद्यमान है और इससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं।

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गीतांजली अपने डिवाइस के साथ।


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गीतांजली ने इस विषय पर आगे काम करते हुए एक डिवाइस तैयार किया, जिससे पानी में शीशे का पता लगाया जा सके। इस उपकरण का नाम है “टेथिस”, जिसे ताजा पानी की ग्रीक देवी के नाम पर रखा गया है। यह उपकरण एक कार्ट्रीज का उपयोग करता है, जिसमें कार्बन नैनोट्यूब होते हैं, जो परीक्षण कर सकते हैं कि पानी के नमूने में शीशा है या नहीं। यह उपकरण से एक सेलफोन एप्प के साथ जुड़ा होता है और इसके परिणाम के बारे में उपयोगकर्ता जान सकते हैं। गीतांजली ने इस डिवाइस को 2017 Discovery Education 3M Young Scientist Challenge प्रतियोगिता में भेजा था, जहां इसे काफी वाहवाही मिली। अमेरिका में यह प्रतियोगिता मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आयोजित की जाती है। गीतांजली को 25 हजार डॉलर का पुरस्कार भी मिला है।

अपनी इस जीत पर गीतांजली का कहना हैः



“जब मुझे इस जीत के बारे में पता चला, तब मैं चौंक गई। मैंने तो बस एक इन्ट्री विडियो भेजा था, ताकि लोगों को पानी की समस्या के बारे में बताया जा सके और इस संबंध में जागरूकता फैलाई जा सके। हालांकि, जब मैं जीत गई, तब मुझे लगा कि अब मुझे इस प्रतियोगिता के सभी जजों के सामने जाकर अपने डिवाइस का प्रदर्शन करना चाहिए। इससे उन्हें यह पता चलेगा कि आखिर यह किस तरह मददगार साबित हो सकता है।”

यह रहा गीतांजली का विडियो।

गीतांजली का कहना है कि उसे विज्ञान में खासी दिलचस्पी है और वह वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान अपने खोज के जरिए करना चाहती है। गीतांजली ने कहा कि इस डिवाइस को बनाने में उसके स्कूल ने भी मदद की है। उसे लैब उपलब्ध करवाया गया साथ ही इस डिवाइस की थ्री डी प्रिन्ट में स्कूल के कर्मचारियों ने उसकी मदद की।

गीतांजली फिलहाल कोलाराडो के डेनेवर इलाके में स्थित लोन ट्री में रहती हैं। वह पब्लिक चार्टर स्कूल की छात्रा है। उसका रुझान विज्ञान, इन्जीयरिंग व गणित में अधिक है।


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