गीता के इस श्लोक में छिपा है जीवन की सफलता का मंत्र, आप भी जान लीजिए

Updated on 29 Jul, 2018 at 6:14 pm

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महाभारत में श्रीकृष्ण ने रणभूमि में अर्जुन को गीता का जो उपदेश दिया था वो आज भी सार्थक है। गीता में कही गई बातों पर अमल करके कोई भी इंसान जीवन में सफल हो सकता है। गीता के कुछ श्लोक ऐसे हैं, जिनका पालन करने पर आपकी ज़िंदगी की सारी मुश्किलें दूर हो जाएंगी और कामयाबी आपके कदम चूमेंगी। चलिए, आज आपको गीता के एक ऐसे ही श्लोक के बारे में बताते हैं।

 

विष्णुरेकादशी गीता तुलसी विप्रधेनव:।

असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी।।

 

गीता के श्लोक  (gita shlok success mantra)

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इस श्लोक में बताई बातों का पालन करके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति पाई जा सकती है। श्लोक में जो बातें बताई गई हैं उसमें सबसे पहले ज़िक्र है विष्णु जी की पूजा करना। जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना से जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती है और आप सफलता की ओर आगे बढ़ते हैं। हरि नाम के जाप से आपकी ज़िंदगी बदल जाएगी।

हरि नाम के जाप के साथ ही श्लोक में गीता पाठ का नियम भी बताया गया है। भागवात गीता भगावन श्रीकृष्ण का साक्षात रूप है, इसलिए जो भी इसका रोज़ाना पाठ करता है, उस पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है और भगवान उसके संकटों को हर लेते हैं।

 

 



श्लोक में तुलसी को भी बहुत महत्व दिया गया है। घर में तुलसी का पौधा होना जरूरी है, क्योंकि यह नकारात्मक उर्जा को दूर करके घर का वातावरण शुद्ध बनाता है। सुबह-शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही तुलसी की मंजरी को भी समय-समय पर हटा लेना चाहिए।

 

 

जीवन में सफल होने के लिए बाकी काम के साथ ही गौ सेवा भी बहुत ज़रूरी है। जिन घरों में गाय पाली जाती है, वहां देवी-देवताओं का वास होता है। सिर्फ गाय के दूध ही नहीं, बल्कि उसके मूत्र और गोबर को भी पवित्र माना गया है। जो लोग घर में गाय नहीं पालते उन्हें गोशाला में जाकर गाय की सेवा करनी चाहिए।

 

 

जीवन में सफल होने के लिए ये नियम गीता के इस श्लोक में बताए गए हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप सिर्फ इन्हीं नियमों का पालन करे और अपना वास्तविक काम छोड़ दें। जिस काम में आप सफल होना चाहते हैं, उसमें आपको अपना सौ फीसदी देना ही होगा।


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