12 साल की लड़की जो कभी स्कूल नहीं गई, वो अब सीधा बोर्ड का एग्ज़ाम देगी

Updated on 29 Oct, 2018 at 12:53 pm

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अपने देश में नीची कक्षाओं में दाखिले से लेकर बोर्ड एग्ज़ाम, वोट देने की उम्र, यहां तक की शादी के लिए भी न्यूनतम उम्र तय की गई है। ये एक स्वस्थ जीवन को ध्यान में रखकर तय की गई है और सभी आमोखास लोग इसे फ़ॉलो भी करते हैं। लेकिन कुछ मामलों में इनमें छूट भी मिलती है। ऐसा ही एक मामला बंगाल में सामने आया है जो सबका ध्यान खींच रहा है।

हावड़ा की सैफा खातून बिना स्कूल गए महज़ 12 साल की उम्र में बोर्ड एग्ज़ाम में बैठने वाली है।

 

बोर्ड एग्ज़ाम की न्यूनतम आयु 14 साल निर्धारित है। लेकिन सैफा ने वेस्ट बेंगॉल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के द्वारा एक्सटर्नल कैंडिडेट्स का इलिजिबिलिटी टेस्ट पास किया था। इसमें ने सैफा 52 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसी आधार पर सैफा को 2019 में होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है। ऐसे मामले बड़े अंतराल के बाद देखने को मिल रहे हैं जिससे बोर्ड मेंबर भी हैरान हैं।

 

बंगाल बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमोय गांगुली कहते हैं-


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“साल 1991 के बाद किसी एक्सटर्नल कैंडिडेट को ऐसी अनुमति मिली है। सैफा के पिता मोहम्मद ऐनुल ने साल 2019 के लिए अनुमति मांगी है। सैफा ने टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन किया है जो कि कभी स्कूल नहीं गई है।”

 

 

पिछले साल अगस्त्य जायसवाल ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा महज 11 साल में पास की थी। ऐसे मामलों को प्रोत्साहित तो नहीं किया जाता लेकिन अपवाद स्वरूप मौके दिए जाते हैं। कुछ उम्मीदवार जल्दी ही अपनी एकेडेमिक शिक्षा पूरी कर लेना चाहते हैं। नो डाउट, ऐसे छात्र मेधावी होते हैं।

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