चपरासी की बेटी बनी जज, लेकिन पिता खुशखबरी नहीं सुन सकते

Updated on 4 Nov, 2017 at 4:12 pm

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अपने सपनों को साकार करने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है प्रतिबद्धता और समर्पण। इसके बल पर इंसान को हर काम में सफलता मिलती है। ऐसी प्रतिबद्धता दिखाई है बिहार की जूली ने, जो पहली बार में ही बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा पास करके जज बन चुकी हैं। वैसे इससे ज़्यादा गर्व की बात ये है कि जूली उसी कोर्ट में जज बनी हैं, जिसमें उनके पिता कभी चपरासी की नौकरी किया करते थे।

अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए जूली ने अपनो को पूरी तरह से झोंक दिया और उनके इसी समर्पण का नतीजा है कि तमाम मुश्किलों और अभावों के बावजूद जूली ने बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर ली, लेकिन अफसोस की बेटी की इस सफलता की खुशियां बांटने के लिए पिता जगदीश साह साथ नहीं हैं। दरअसल, जगदीश भागलपुर के जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती है और गुरुवार को उनकी तबियत और बिगड़ गई। डॉक्टर ने सख्त हिदायत दी है कि कोई उनसे नहीं मिल सकता।


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हालांकि, जूली और उसके परिवारवालों को पूरी उम्मीद है जब जूली के पिता को उनकी इस उपलब्धि का पता चलेगा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा।



जदगीश साह भागलपुर सिविल कोर्ट में चपरासी का काम करते थे, जहां न जाने कितने सालों तक उन्होंने जजों को सलाम ठोका है और आज उनकी बेटी वहीं जज बन गई है। जूली ने सरकारी स्कूल से आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद साधारण सिटी कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। उसके बाद वर्ष 2011 में टीएनबी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। जूली ने इस साल की शुरुआत में 29वीं बिहार न्यायिक सेवा की परीक्षा दी थी और पहले प्रयास में ही सफल रही।

इस बीच, 2009 में उनकी शादी हो गई थी, लेकिन अपनी शादी को उन्होंने अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और पढ़ाई जारी रखी। ज़ाहिर सी बात है कि जूली अपनी कामयाबी से बहुत खुश है, मगर साथ ही उन्हें अपने बीमार पिता की भी चिंता सता रही है। उन्हें इस बात का अफसोस है कि ज़िंदगी की सबसे बड़ी सफलता को अपने पिता के साथ साझा नहीं कर पा रहीं।


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