अंटार्कटिका में टूटकर अलग हुआ बड़ा आइसबर्ग, तबाही की आशंका

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Updated on 13 Jul, 2017 at 8:03 pm

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प्रकृति के साथ जिस तरह खिलवाड़ हो रहा है, वो अपने विनाश के संकेत भी दे रही है।

अंटार्कटिका में मौजूद चौथे सबसे बड़े आईसबर्ग (हिमचट्टान) ‘लार्सेन सी’ का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। अलग हुए इस हिमखंड का आकार 5800 वर्ग किलोमीटर है।

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Image source: washingtonpost

अलग हुए इस टुकड़े के आकार का अंदाजा आप इसीसे लगा सकते हैं कि यह भारत की राजधानी दिल्ली के आकार से 4 गुना बड़ा और गोवा के आकार से डेढ़ गुना बड़ा है। वहीं, अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी से 7 गुना विशाल है।

यह हिमखंड 10 से 12 जुलाई के बीच टूटकर अलग हुआ। नासा ने अपने आधिकारिक ट्विटर पर इस टुकड़े के अलग होने का विडियो भी साझा किया है।

ये घटना अपने आप में तबाही के मंजर को अपने साथ लेकर आ रही है, जिसका असर आने वाले समय में जरूर देखा जा सकेगा।



वैज्ञानिकों ने इसके प्रभाव की जानकारी देते हुए बताया कि इस हिमखंड के अलग होने से वैश्विक समुद्री स्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। साथ ही इस महाद्वीप के पास से होकर जाने वाले जहाजों को भी समुद्री स्तर बढ़ने के कारण सावधानी बरतनी होगी।

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उधर भारत पर इस घटना के असर की बात करें तो इसका तत्काल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा, लेकिन लम्बे समय के अंतराल के बाद इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

भारत की 7 हजार 500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा को इससे खतरा होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही अंडमान और निकोबार के कई द्वीप और बंगाल की खाड़ी में सुंदरवन के हिस्से डूब सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस हिमखंड के अलग होने के पीछे कार्बन उत्सर्जन को सबसे बड़ी वजह बताया है। कार्बन उत्सर्जन की वजह से वैश्विक तापमान बढ़ता जा रहा है, जो ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारक है।

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Image source: washingtonpost

यह हिमखंड किस दिशा की ओर जा रहा है, इस पर वैज्ञानिक नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि यह हिमखंड आने वाले वक्त में कई टुकड़ों में भी बंट सकता है या फिर एक ही टुकड़े में भी रह सकता है।


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