बंगाल की 4 पारंपरिक मिठाइयों के लिए GI टैग लेगी ममता सरकार, नकल रोकने की कवायद

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Updated on 22 Feb, 2016 at 4:31 pm

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रसगुल्ले पर बढ़ रहे विवाद के बीच, पश्चिम बंगाल सरकार चार बंगाली पारम्परिक मिठाइयों के लिए ज्योग्राफिकल आइडेन्टिफिकेशन (GI) हासिल करने पर विचार कर रही है।

इन मिठाइयों में जयनगर का मोआ, कृष्णनगर का सरपुरिया, तथा वर्धमान का सीताभोग और मिहीदाना प्रमुख है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि GI टैग की बदौलत न केवल इन मिठाइयों की नकल पर लगाम लग सकेगी, बल्कि इन्हें भविष्य में निर्यात भी किया जा सकेगा। उत्पादों में इस्तेमाल किए जाने वाला GI टैग इसके मूल स्थान को दर्शाता है।

दक्षिण 24 परगना का जयनगर इलाका अपनी पारम्परिक मिठाई मोआ के लिए प्रसिद्ध है। मोआ को धान से निकले च्विरा और खजूर के गुड़ को मिलाकर बनाया जाता है। जबकि, नदिया में कृष्णनगर नामक इलाका मलाई से बनने वाले सरपुरिया के लिए जाना जाता है। वहीं, बर्धमान अपने सीताभोग और मिहीदाना के लिए प्रसिद्ध है।

माल्दा में आयोजित मिष्टी मेला में इस बात की जानकारी देते हुए फूड प्रोसेसिंग इन्डस्ट्रीज के निदेशक जयन्त कुमार एकट ने बताया कि किसी भी उत्पाद के नकल को रोकने के लिए GI टैग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में मिठाइयों के निर्यात के बारे में सोच रही है, ऐसे में GI टैग से मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल और उड़ीसा सरकारों के बीच रसगुल्ले पर जंग छिड़ गई थी।

पश्चिम बंगाल का दावा है कि रसगुल्ले का आविष्कार कोलकाता में 18वीं सदी में किया गया था, जबकि उड़ीसा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनके राज्य में रसगुल्ला करीब 500 साल पहले ही अस्तित्व में आ गया था।


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