‘कांग्रेस पार्टी के बौद्धिक दिवालिएपन की निशानी है संघ से इस्लामिक स्टेट की तुलना’

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Updated on 14 Mar, 2016 at 2:02 pm

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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इस्लामिक स्टेट की तुलना किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए आजाद से माफी की मांग की है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस वाकये को कांग्रेस पार्टी के बौद्धिक दिवालिएपन की निशानी बताया है।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को राज्यसभा में यह मामला उठाते हुए गुलाम नबी आजाद से माफी की मांग की। दूसरी तरफ, आजाद ने दावा किया कि उनके बयान में अगर कुछ गलत मिले तो उन्हें संसद से निकाल देना चाहिए। उन्होंने संघ और इस्लामिक स्टेट की तुलना किए जाने से इन्कार किया है।

गौरतलब है कि शनिवार को गुलाम नबी आजाद ने मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से आयोजित राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में कहा थाः


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“मुसलमानों के बीच भी ऐसे लोगों को देखते हैं जो मुस्लिम देशों की तबाही की वजह बन गए हैं। इनके पीछे कुछ ताकते हैं, परंतु हमें यह समझने की जरूरत है कि मुसलमान इसमें क्यों शामिल हो रहे हैं, वे क्यों फंसते जा रहे हैं? आजाद ने कहा कि इसलिए, हम आईएसआईएस जैसे संगठनों का उसी तरह विरोध करते हैं जैसे आरएसएस का विरोध करते हैं।”

इससे पहले आजाद के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने गुलाम नबी आजाद को सोनिया गांधी का गुलाम बताया।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने आजाद के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक राष्ट्रवादी संगठन है। वहीं, विश्व हिन्दू परिषद ने गुलाम नबी आजाद को संसद से हटाने की मांग की और कांग्रेस, सोनिया गांधी से माफी मांगने को कहा है।

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