यहां हर कोई है ‘दशरथ मांझी’, मिल कर बना दिया लंबा पुल

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Updated on 19 Dec, 2015 at 10:35 am

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सरकार की उदासीनता से तंग आ चुके हरियाणा के सिरसा जिले में अलीका और पनिहारी गांवों के निवासियों ने खुद ही पुल का निर्माण कर लिया है। ग्रामीणों को लगभग चार दशकों से इस पुल के निर्माण का इंतज़ार था । गांव वालों ने मिलकर इस पुल का निर्माण सफलतापूर्वक कर लिया है, जिसकी वजह से अब गांव की दूरी सिरसा शहर से 30 किलोमीटर कम हो गई है।

 

 

इस सफलता पर मेजर सिंह, पुल निर्माण समिति के सचिव, कहते हैंः

“सरकारें आईं और चली गईं। सभी ने हमसे वादा किया, लेकिन हमारी मदद के लिए कोई झांकने नहीं आया। इस सिलसिले में हमने कांग्रेस, भाजपा और आइएनएलडी के मंत्रियों, सांसदों, मुख्यमंत्रियों और नेताओं से मुलाकात की, लेकिन हमे आश्वासनों के सिवाए और कुछ नही मिला।”

 


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ग्रामीणों को आनाज़ बेचने के लिए हर दिन 40 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। अब घग्गर नदी पर 214 फुट लंबा और 16 फुट चौड़ा स्टील और कंक्रीट से बना यह पुल 1.25 लाख से अधिक लोगों के लिए एक जीवन रेखा बन गया है। इस पुल के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने लगभग एक करोड़ की धनराशि चंदे के रूप में जुटाई।

पनिहारी गाँव के हरदेव सिंह कहते हैंः

“इस पुल के उद्घाटन मे राजनीतिज्ञों या नौकरशाहों के लिए कोई जगह नहीं है। हमारे लिए वे मजदूर और महिलाएं अधिक महत्वपूर्ण हैं जिन्होंने 500 रुपए से लेकर एक हजार रुपए का अनुदान किया। सरकार और प्रशासन हमें तीन दशकों से मूर्ख बनाता आया है।”

 

 

यही नहीं, ग्रामीणों ने यह भी फ़ैसला किया है कि किसी वीआईपी या राजनीतिज्ञ को कभी इस पुल का उपयोग करने की अनुमति देने नही देंगे। यह पुल लोगों द्वारा, लोगों के लिए है और लोगों के लिए ही रहेगा।

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