“मैं ABVP से नहीं डरती” कैम्पेन चलाने वाली इस लड़की को वामपंथियों का समर्थन, लेकिन जानिए यह एकतरफा क्यों है

author image
Updated on 25 Feb, 2017 at 6:55 pm

Advertisement

गुरमेहर कौर कारगिल के युद्ध में शहीद होने वाले कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी हैं। उन्होंने पिछले दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच शांति का आह्वान करते हुए एक विडियो पोस्ट किया था, जो वायरल हो गया।

लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा गुरमेहर एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्हें न केवल सोशल मीडिया में, बल्कि पारंपरिक मीडिया में व्यापक समर्थन मिल रहा है। हालांकि, इस बार मामला कुछ अलग है। इस बार वह विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, एक खास राजनीतिक समूह के खिलाफ।

गुरमेहर ने सोशल मीडिया पर एक कैम्पेन शुरू किया है, जिसका नाम है “मैं ABVP से नहीं डरती”। यह कैम्पेन दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में AISA और ABVP के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद शुरू किया गया है।


Advertisement

मीडिया और खासकर वामपंथियों ने ABVP विरोधी संदेश की वजह से गुरमेहर के इस पोस्ट को बड़े पैमाने पर शेयर किया है। कौर ने ABVP के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है, जो कुछ इस तरह है।

यहां तक कि वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी ने भी ट्वीटर पर गुरमेहर का प्रशंसागान किया है।

गुरमेहर कौर ने ABVP को ऐसा संगठन बताया है, जिसे “गणतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा नहीं” है साथ ही “नेतृत्व के मामले में यह हिंसा का सहारा” लेती है। कौर ने ABVP के छात्रों को “गुंडा व मवाली” बताया है।

यह सही है कि एक छात्रा होने के नाते गुरमेहर को यह अधिकार है कि वह किसी छात्र संगठन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएं। साथ ही उन्हें यह भी अधिकार है कि वह किसी खास विचारधारा से अपना नाता रखें। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन के लिए कुछ मीडिया संस्थान या वामपंथी संगठन जिस तरह उनके पिता की “शहादत का इस्तेमाल” कर रहे हैं, वह गलत है। मीडिया की हेडलाइन्स लगभग इन्हीं पंक्तियों के साथ शुरू हुई हैं- कारगिल शहीद की बेटी का कैम्पेन..

बरखा दत्त और निधि राजदान ने कौर के कथित साहस की प्रशंसा की है। हालांकि, उन्हें गुरमेहर कौर के “शहीद पिता का इस्तेमाल” करने के लिए विरोध का सामना करना पड़ा।



जहां तक वामपंथियों की बात तो है, तो वे इस बात को लेकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि गुरमेहर कौर ने ABVP द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के विरोध में उनका समर्थन किया है। हालांकि, वे वामपंथी छात्र समूहों तथा राजनीतिक दलों द्वारा देशभर में इससे कहीं अधिक क्रूर व हिंसक वारदातों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

रामजस कॉलेज में बुधवार को जो कुछ भी हुआ था, वह दो समूहों ABVP व वामपंथियों की आपस में झड़प थी। इस घटना में दोनों समूहों के छात्र घायल हुए हैं। यह “अभिव्यक्ति की आजादी” पर एकतरफा हमला नहीं था, जैसा कि वामपंथी संगठन और उनका साथ देने वाले मीडिया हाउस दावा कर रहे हैं।

रामजस कॉलेज में होने वाली हिंसक झड़प के केन्द्रविन्दु में जेएनयू का देश-विरोधी छात्र नेता उमर खालिद है, जिसे यहां एक सेमिनार में संबोधित करने के लिए वामपंथी छात्रों ने बुलाया था। ABVP ने उमर खालिद के कश्मीर की आजादी तथा भारत-विरोधी होने का हवाला देते हुए इस सेमिनार का विरोध किया। बाद में कॉलेज प्रशासन को सेमिनार को रद्द कर देना पड़ा।

वामपंथी छात्र समूह को लगा कि यह उनकी हार है। सेमिनार के रद्द होने के विरोध में वामपंथियों ने रैली निकाली, जो बाद में हिंसक झ़ड़प में तब्दील हो गई।

वामपंथी ये दावा करते हैं कि “अभिव्यक्ति की आजादी बरकररार रहनी चाहिए”, हालांकि वे खुद इस सिस्टम में विश्वास नहीं रखते। रामजस कॉलेज की घटना इसका ताजा उदाहरण है।

अब बात गुरमेहर कौर की। गुरमेहर कॉलेज कैम्पस में सभी तरह की छात्र हिंसा की निन्दा करने की बजाए, किसी एक पक्ष के साथ खड़ी दिख रहीं हैं। यह वही पक्ष है जो उमर खालिद का समर्थन करता है।

गुरमेहर ने यहां एक महत्वपूर्ण बात कही है।

हालांकि, वह भूल जाती हैं कि वामपंथी खुद इस विचार से इत्तेफाक नहीं रखते।

अब रिडिट्ट के यूजर्स कुछ ऐसा कह रहे हैं।

उमर खालिद वही व्यक्ति है, जिसने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की थी। उमर खालिद “कश्मीर की आजादी” का समर्थक है।

एक शहीद की बेटी अगर इस वास्तविकता को नजरंदाज कर रही है तो यह संभवतः हमारे महिमामंडित शिक्षण संस्थानों में दी जा रही शिक्षा पर सवालिया निशान लगाता है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement