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इस जर्मन जोड़े का कुत्ता चेन्नई में खो गया था, अब 3 महीने बाद मिला

1:05 pm 26 Oct, 2017

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आमतौर पर ऐसा कम ही होता है कि अगर आपका पालतू जानवर कहीं गुम हो गया तो उसका पता जल्द चल जाए। कभी-कभी तो ऐसा होता है कि आपको पता भी नहीं चलता और आप अपने पालतू जानवर के आने की बाट जोहते रह जाते हैं। हालांकि, जर्मन दंपति जैनिन व स्टीफन इस मामले में भाग्यशाली कहे जाएंगे। दरअरल, इस जर्मन जोड़े का 18 महीने का लैब्रडर ल्यूर चेन्नई के मरीना बीच पर खो गया था। करीब 3 महीने के बाद स्थानीय लोगों की मदद से यह एक बार फिर से उन्हें मिल गया है।

ल्यूक एक बीच पर।

पिछले साल ग्रीस में छुट्टियां मनाने के दौरान इस जोड़े को ल्यूक सड़क किनारे मिला था। उन्होंने ल्यूक को अपना लिया और उसके लिए एक पासपोर्ट भी बनवा दिया। साथ ही ल्यूक को माइक्रोचिप से लैस कर दिया गया, ताकि वह दुनिया का भ्रमण करने के लिए तैयार हो सके।

गेट वे ऑफ इंडिया पर ल्यूक।

इस साल 8 जुलाई को यह जोड़ा मरीना बीच पर था, तभी एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने ल्यूक को चुरा लिया।

बाद में इस जोड़े ने ल्यूक को हर तरफ खोजने की तमाम कोशिशें की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। इसी क्रम में उन्होंने व्हाट्सएप्प पर एक कैम्पेन शुरू किया, साथ ही मरीना बीच थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई।


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इस घटना के करीब तीन सप्ताह बाद इस जर्मन दंपति को विजया नारायणन नामक एक पशु अधिकार कार्यकर्ता ने फोन किया और उन्हें ल्यूक के बारे में जानकारी दी। नारायणन का कहना था कि उन्होंने तमिल अखबारों में इस संबंध में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया था।

ल्यूक की तलाश में अखबारों में विज्ञापन दिए गए।

यही नहीं, उन्होंने 10 हजार से अधिक लिफलेट छपवाकर बंटवाए थे। विजया नारायणन और उनके कार्यकर्ता ल्यूक की तलाश में पेट शॉप, ब्रीडर्स और यहां तक की डॉग ट्रेनर्स के यहां भी चक्कर काटे थे। विजया को कई लोगों ने फोन पर ल्यूक की जानकारी होने का दावा किया था। बाद में उन्हें चेन्नई में ल्यूक मिल गया।

चैन्नई में विजया नारायणन जर्मन दंपति के साथ।

आखिरकार, जैनिन व स्टीफन पिछले 23 अक्टूबर को विजया नारायणन के घर चेन्नई पहुंचे और ल्यूक से मिले। यह क्षण बेहद मार्मिक था।

यह विडियो पशु कल्याण कार्यकर्ता श्रवण कृष्णन ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है।

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