गे सेक्स नहीं है अपराध, व्यक्तिगत आजादी से जुड़ा यह मामलाः संघ

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Updated on 22 Jun, 2016 at 6:41 pm

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राष्ट्रीय स्वयंसेव संघ का कहना है कि गे सेक्स या होमोसेक्सुअल रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना जाना चाहिए और यह व्यक्तिगत आजादी से जुड़ा हुआ मामला है।

संघ के संयुक्त सचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि समलैंगिकता कोई अपराध नहीं है और यह दूसरों की जिन्दगी पर भी कोई असर नहीं डालता है। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि जल्दी ही महिलाएं भी संघ की शाखाओं में पुरुषों के साथ हिस्सा ले सकेंगी।

गौरतलब है कि भारत उन देशों में एक है, जहां समलैंगिकता को अपराध माना जाता है और इसमें अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। वर्ष 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 377 को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में 158 साल पुराने कानून की इस धारा को बरकरार रखा।

फिलहाल माना जा रहा है कि संघ के इस बयान के बाद केन्द्र में मोदी सरकार धारा 377 को खत्म करने की दिशा में कदम उठा सकती है।



गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाने की कोशिश की थी, जिसमें समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने की बात कही गई थी। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने इसका विरोध किया था, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसका समर्थन किया था।

इससे पहले भाजपा के महासचविव राम माधव ने भी कहा था कि समलैंगिकता पर प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन जब मामला अपराध का हो तो इस पर अच्छी तरह से विचार किए जाने की जरूरत है।

इस बीच, कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में अब महिलाएं भी हिस्सा ले सकेंगी। संयुक्त सचिव दत्तात्रेय होसबोले के मुताबिक, ऐसा अगले साल से हो सकेगा।

फिलहाल, महिलाएं अन्य सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी तों हैं, लेकिन उन्हें शाखाओं में जाने की इजाजत नहीं है।


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