अब विज्ञान ने भी माना, गंगा के पानी में है बीमारियों से लड़ने की अद्भुत क्षमता

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Updated on 4 Oct, 2016 at 3:30 pm

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जो बात युगों-युगों से हमारे ऋषि-मुनि कहते आए हैं, उसकी पुष्टि अब वैज्ञानिकों ने भी कर दी है। एक नए अध्ययन में यह बात साबित हो गई है कि आस्था के प्रतीक गंगा जल में रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ के इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्रोलॉजी के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि गंगा के पानी में एक किस्म का वायरस और बैक्टीरिया होते हैं, जो पानी में बिमारी फैलाने वाले जीवाणुओं को ख़त्म कर देते हैं।

इस अध्ययन के जरिए वैज्ञानिकों ने पहली बार गंगा के पानी में रोगों को ठीक करने की क्षमता का पुख्ता सबूत भी अपने शोध के साथ पेश किए हैं। इस अध्ययन में बताया गया है कि गंगा का जल टीबी और न्यूमोनिया जैसी बीमारियों से लडऩे में कारगर है।

वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया कि 20 से 25 तरह के अच्छे जीवाणु गंगा के जल में पाए जाते हैं। जो टीबी, न्यूमोनिया, कॉलरा और मूत्र की बीमारियों को पैदा करने वाले कीटाणुओं को नष्ट कर देते हैं।


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संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ षणमुगम मैयलराज का कहना है-

“हरिद्वार, बनारस और भागलपुर के पास सुलतानगंज में हमने गंगा जल के नमूने लेकर गहन अध्ययन किया। इस अध्ययन में हमने पाया कि गंगा जल में ऐसे वायरस होते हैं, जो कई बीमारियों के कीटाणुओं को चट कर जाते हैं। इससे गंगा जल औषधि का काम करता है।”

गंगा जल, इसके औषधीय गुण की वजह से लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों के लिए भी पहेली रहा है। इससे पहले भी एक शोध में कहा गया था कि गंगा का पानी  कभी सड़ता नहीं। लोग इसका पानी बोतलों में वर्षों तक रख सकते हैं।

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