गंगा-यमुना को अब ‘जीवित प्राणी’ का दर्जा नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

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Updated on 8 Jul, 2017 at 8:36 pm

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देश की दो सबसे पवित्र नदियां गंगा और यमुना अब ‘सजीव प्राणी’ के दायरे में नहीं आएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के देश की दो अहम नदियों, गंगा और यमुना को जीवित मानव इकाई का दर्जा देने के फैसले पर रोक लगा दी है।

दरअसल, 20 मार्च को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि गंगा देश की पहली जीवित नदी है और इसे वो सारे हक मिलने चाहिए जो किसी इंसान को मिलते हैं।

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कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में गंगा और यमुना को ‘जीवित मनुष्य’ की संज्ञा दी थी। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की पीठ ने अपने आदेश में दोनों नदियों, गंगा और यमुना के साथ एक ‘जीवित इंसान’ की तरह व्यवहार किए जाने और उनका मानवाधिकार सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट ने हरिद्वार के रहने वाले मोहम्मद सलीम द्वारा गंगा के तटों के किनारे खनन और पत्थरों को तोड़ने को लेकर दायर जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया था।


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लेकिन राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गंगा चार राज्यों से बहती है, इसलिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ऐसा आदेश नहीं दे सकता। गंगा की सफाई का मुद्दा उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला है, इसलिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव या फिर महाधिवक्ता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को अव्यवहारिक बताते हुए गंगा और यमुना को जीवित मानव इकाई का दर्जा देने के फैसले पर रोक लगा दी।

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