गणेश चतुर्थी पर गणपति को मोदक का भोग क्यों लगाया जाता है, आइए जानते हैं!

Updated on 11 Sep, 2018 at 11:37 am

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भगवान गणेश को सिद्धि विनायक भी कहा जाता है। ये प्रथम पूज्य देवता हैं और इन्हें बुद्धि, समृद्धि व सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा जाता है। महाराष्ट्र में इनके पूजन का विशेष विधान है और देश-दुनिया में मुंबई इसके लिए भी जाना जाता है। गणेश चतुर्थी इस बार 13 सितंबर को है और यह दस दिवसीय उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक जारी रहेगा। हालांकि, कई स्थानों पर मात्र चतुर्थी को पूजन किया जाता है।

 

मूसक सवार गणेश जी जगत परिक्रमा के स्थान पर माता-पिता की परिक्रमा कर सुनाम हासिल किया था और प्रथम पूज्य बने थे। यही कारण है कि ये न केवल शिव-पार्वती के प्रिय हैं, बल्कि देवताओं में इन्हें विशेष स्थान प्राप्त है।

 

 

गणेश जी को प्रसन्न करने से सर्वमनोकामना की पूर्ति होती है। लिहाजा भक्त इन्हें खुश करने में कोई कोताही नहीं करते हैं। भगवान गणेश जी को मोदक बहुत पसंद है और भक्त उन्हें इसका भोग अवश्य ही प्रदान करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हें मोदक ही क्यों पसंद हैं?

 


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मोदक का अर्थ होता हैं मोद (आनन्द) प्रदान करने वाला। साथ ही यह सात्विकता और शुद्धता का भी परिचायक है। यह भी बताया जाता है कि मोदक ज्ञान का प्रतीक होता हैं, लिहाजा भगवान गणेश इसे अधिक पसंद करते हैं। मोदक बाहर से कठोर व भीतर से नरम होता है, इसी प्रकार घर के मुखिया को ऊपर से सख्त रहना चाहिए और भीतर से नरम रहते हुए सबका पोषण करना चाहिए। मोदक का एक संदेश ये भी है!

 

 

गणेश भक्त हजार मोदकों का भोग लगाते हैं, ताकि भगवान उनकी सभी कामनाओं को पूर्ण करें।

पद्मपुराण के अनुसार, माता पार्वती के मुख से अमृत से बने मोदक का बखान सुन गजानन इसे खाने की इच्छा से खुद को रोक नहीं पाते हैं। तभी से इन्हें ये मोदक इतने पसंद हैं कि देखते ही खुश हो जाते हैं!

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