क्रिकेट के दीवाने भारत ने दुनिया को दिए ये 5 मशहूर खेल, आपको शायद यकीन न हो

9:00 am 19 Jul, 2018

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भारत में जब भी खेल का ज़िक्र होता है तब आपके ज़ेहन में भी क्रिकेट और फुटबॉल के अलावा शायद ही कोई खेल आता होगा, क्योंकि भारत में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय क्रिकेट है। उसके बाद कहीं फुटबॉल का नंबर आता है। यहां तक कि राष्ट्रीय खेल हॉकी की हालत भी दयनीय है। लोगों को अपने देश के हॉकी खिलाड़ियों के नाम तक पता नहीं हैं।

 

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत ने दुनिया को ये 5 मशहूर खेल दिए हैं।

पोलो

अमीरों का खेल माने जाने वाला पोलो भारत में राजा-महाराजाओं के समय बहुत मशहूर था। इस खेल को घुड़सवारी करते हुए खेला जाता है। दोनों टीम में चार-चार खिलाड़ी होते हैं और दो गोल पोस्ट होते हैं। एक लंबे लचीले मैलेट से लकड़ी की बॉल को गोल पोस्ट तक पहुंचाना होता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस खेल का जन्म मणिपुर में हुआ था। 1859 में ब्रिटिश सेना के अधिकारियों और चाय बागान के लोगों की मदद से सिलचर पोलो क्लब की स्थापना की गई। उस समय के लेफ्टिनेंट जॉय शेरेर ने लोगों को यह खेल खेलते हुए देखा और सोचा कि अंग्रेज़ों को यह खेल सीखना चाहिए। पोलो अब पूरी दुनिया में मशहूर हो चुका है और अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक हर जगह खेला जाता है। कम ही लोग जानते हैं कि 1900-1939 तक पोलो भी ओलंपिक खेल का हिस्सा था।

 

 

शतरंज

हाल ही में चेन्नई के रमेशबाबू दुनिया के दूसरे सबसे छोटे शतरंज ग्रैंडमास्टर बने। उनकी इस उपलब्धि पर जाहिर है देश को दोहरी खुशी होनी चाहिए, क्योंकि इस खेल का जन्म भारत में ही हुआ। बावजूद इसके शतरंज लोगों के बीच ज़्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका। वैसे देखा जाए तो शतरंज का इतिहास लगभग 1,500 साल पुराना है। उस समय इसे ‘चतुरंग’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘सेना के चार भाग।’ यह खेल छठी शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के दौरान बेहद लोकप्रिय था। इतना ही नहीं सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान भी इस खेल के प्रमाण मिलता है। आधुनिक शतरंज भी भारत की ही देन है। यह खेल अरबी और फारसी लोगों के साथ भारत से पूरी दुनिया में गया और मशहूर हो गया है।

 

 

कबड्डी


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गांव और कस्बों का सबसे लोकप्रिय खेल है कबड्डी। इस खेल को 1936 के बर्लिन ओलंपिक में प्रसिद्धि मिली। कबड्डी बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है और हमारे देश में कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्य का भी यह मुख्य खेल है। गली-कूचों में खेले जाने वाले इस खेल के लिए कुछ नियम-कायदे बनाने के लिए 1950 में ऑल इंडिया कबड्डी फेडरेशन बनाया गया। जापान ने 1979 से कबड्डी खेलना शरू किया। पहली एशियाई कब्बडी चैम्पियनशिप 1980 में हुई थी, जिसमें भारत चैंपियन बना था।

 

 

कैरम

इसे भारत का पारिवारिक खेल कह सकते हैं, क्योंकि छुट्टियों के दौरान अक्सर बच्चे और बड़े सब मिलकर ये खेलते हैं। इस खेल की शुरुआत भी भारत ने ही की है। 1958 में भारत ने कैरम क्लबों के आधिकारिक संघ बनाए, जो कैरम टूर्नामेंट को स्पॉन्सर करने लगे और जीतने वाली टीम को इनाम भी दिया जाने लगा। 1988 में इंटरनेशनल कैरम फेडरेशन चेन्नई में आया। भारत का ये खेल जल्द ही यूरोप और अमेरिका में भी खेला जाने लगा।

 

बैडमिंटन

इस मशहूर खेल की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई। उस समय अंग्रेज़ों ने पुणे के गैरीसन शहर में इसे खेला। इस खेल को पूना, या पूनाह के नाम से भी जाना जाता था और सबसे पहले 1873 में इसके नियम पुणे में ही तैयार किए गए थे।

समय के साथ ये खेल पूरी दुनिया में मशहूर हो गया, मगर भारत में सारे खेलों की तरह यह भी क्रिकेट की चमक के आगे थोड़ा फीका पड़ गया। हालांकि, साइना नेहवाल, प्रकाश पादुकोण, अपर्णा पोपट, पुलेला गोपीचंद और चेतन आनंद जैसे खिलाड़ियों ने इस खेल में अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

 

 

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