यहां किया जाता है धार्मिक ग्रन्थों का अंतिम संस्कार, जानिए क्यों?

Updated on 25 Feb, 2016 at 11:00 pm

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धार्मिक ग्रन्थ अगर पुराने हो जाएं तो उनका क्या किया जाना चाहिए? आप भी जरूर इस विषय पर सोच रहे होंगे। धार्मिक ग्रन्थ पुराने होने पर, उनके पन्नों के फट जाने पर क्या किया जाना चाहिए- इसका उत्तर मिलता है देहरादून के खुशहालपुर स्थित अंगीठा साहेब गुरुद्वारा में।

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जी हां, इस गुरुद्वारा में धार्मिक ग्रन्थों का ठीक उसी तरह अंतिम संस्कार किया जाता है, जिस तरह कि इन्सानों का।

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दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां सेवक गुरु के उस वचन को पूरा करते हैं, जिसमें उन्होंने धार्मिक ग्रंथों व पुस्तकों को बदहाली से बचाने की बात कही थी। यही वजह है कि सेवक पूरी दुनिया में घूम कर सभी धर्मों के फटे-पुराने ग्रन्थों को इकट्ठा करते हैं और अंगीठा साहेब लाते हैं।

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इन ग्रन्थों को पवित्र कपड़ों में लपेटकर रखा जाता है और इन्हें अग्न को समर्पित कर दिया जाता है। इस आयोजन को अग्नि भेंट सेवा कहते हैं। इसके लिए गुरुद्वारे के हॉल में 24 अंगीठे बनाए गए हैं।


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इस रिपोर्ट के मुताबिक, गुरु सेवक विधि-विधान के साथ एक-एक ग्रंथ को अपने सिर पर रखकर गुरुद्वारे से हॉल तक पहुंचाते हैं। नियम के मुताबिक, एक बार में सिर्फ छह अंगीठों को ही लकडि़यों से सजाया जाता है। प्रत्येक अंगीठे के ऊपर 13-13 ग्रंथ रखे जाते हैं। पंच प्यारे हर अंगीठे की 5-5 परिक्रमा करने के बाद अरदास के साथ अग्नि प्रज्वलित करते हैं।

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अगले दिन कच्ची लस्सी का छींटा मारकर प्रत्येक अंगीठे से फूल (ग्रंथों की राख) चुन लिए जाते हैं। इस सेवा का अंतिम चरण पूरा होता है हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में।

इस राख को पांवटा साहिब स्थित गुरुद्वारे के पीछे यमुना नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

साभारः Bhaskar

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