Advertisement

1857 में मंगल पांडे ने फूंका था बगावत का बिगुल, कांप उठी थी अंग्रेजी हुकूमत

author image
5:43 pm 29 Mar, 2016

Advertisement

महान क्रांतिकारी मंगल पांडे ने साल 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था, जिससे एक महान क्रांति की नींव रखी गई।

अचानक हुई इस क्रान्ति की वजह से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिल गई। यह पहला मौका था जब स्वतंत्रता संग्राम का जलजला अवाम के सिर चढ़ कर बोला।

मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कंपनी की फ़ौज की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री में तैनात थे। इस सेनानी के मन में अंग्रेजों के खिलाफ धधक रही आग ने उस वक़्त विकराल रूप ले लिया, जब ब्रिटिश सेना में इनफील्ड पी-53 राइफल शामिल की गई। मंगल पांडे एनफील्ड पी-53 राइफल के विरोध में थे, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले कारतूस में सुअर और गाय की चर्बी लगी थी। इस कारतूस को दांतों से खोलना होता था।


Advertisement

ब्रिटिश हुकूमत को देश से बाहर का रास्ता दिखाने के मकसद से मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को अंग्रेज अधिकारियों पर हमला कर दिया, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

उनकी गिरफ्तारी के बाद देश में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ रोष आग की तरह फ़ैल गया। उनका कोर्ट मार्शल कर दिया गया और फांसी की तारीख 18 अप्रैल तय की गई। यह खबर मिलते ही देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संग्राम छिड़ गया।

लोगों में बढ़ते हुए रोष, अपने खिलाफ बगावत की चिंगारी को ज्वालामुखी में तब्दील होते हुए देखकर अंग्रेज़ों ने तय वक़्त से 10 दिन पहले ही यानि कि 8 अप्रैल को इस वीर सेनानी को फांसी दे दी।

स्वतंत्रता के लिए छिड़ी इस पहली लड़ाई को ‘1857 का गदर’ कहा जाता है। मंगल पांडे ने आज़ादी की लड़ाई की नींव रखी। यह उनके अथक प्रयासों का नतीजा रहा कि वर्ष 1947 में अंग्रेजी हुकूमत से भारत को आज़ादी मिल गई।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement