अस्पताल ने डेंगू के ईलाज के लिए 18 लाख रुपए का बिल बनाया, फिर भी बच्ची को बचा नहीं सके

Updated on 21 Nov, 2017 at 12:39 pm

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हमारे देश में डॉक्टर को लोग भगवान का रूप मानते हैं। हालांकि, यही डॉक्टर और अस्पताल चलाने वाले लोग जब घोर पेशेवर रवैया अख्तियार करते हैं तब हैवान बन जाते हैं। ऐसा ही वाकया राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गांव के अस्पताल में हुआ है।

डेंगू से पीड़ित एक बच्ची को यहां भर्ती कराया गया था। अस्पताल और इसके डॉक्टर इस बच्ची को बचा तो नहीं सके, लेकिन 18 लाख रुपए का बिल जरूर बना दिया। यही नहीं, अस्पताल ने बच्ची के शव को देने से भी इनकार कर दिया, क्योंकि उसके परिजन बिल की रकम जमा करने की स्थिति में नहीं थे। अस्पताल की तरफ से बिल भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। वहीं, परिजनों का कहना है कि डेंगू का इलाज ठीक से नहीं होने की वजह से बच्ची का देहान्त हो गया।

यह कारनामा कर दिखाया है गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल ने।

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि ईलाज के बिल में डॉक्टरों द्वारा प्रयोग किए 2700 दस्ताने और 660 सिरिंज भी शामिल थे। पीड़ित परिजन ने ट्विटर पर बिल की कॉपी के साथ पूरी घटना की जानकारी दी है, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सभी जरूरी डिटेल्स और रिपोर्ट मेल करने को कहा है। साथ ही अस्पताल के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी मामले की पूरी जानकारी देने को कहा गया है।

मामला पूरी तरह गंभीर दिख रहा है, जो कि अब ट्विटर पर वायरल भी हो गया है। भारी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगाने के साथ-साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।

आरोप है कि अस्पताल ने बच्ची के इलाज में बहुत लापरवाही की है।


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आरोप है कि अस्पताल द्वारा बच्ची के माता-पिता को रोज ब्रेकअप भी उपलब्ध नहीं कराया जाता था। पैरंट्स के बार-बार कहने के बावजूद अस्पताल ने बच्ची का सीटी स्कैन और एमआरआई नहीं कराया।

यह एक बड़े मेडिकल स्कैम का मामला हो सकता है।

एक तो लापरवाही से बच्ची बचाई न जा सकी, ऊपर से महज डेंगू के ईलाज के लिए भारी रकम ने परिजन को एकदम से तोड़ ही दिया है। देखना है मामले में सरकार क्या कुछ करती है। फिलहाल सतर्क ही रहा जा सकता है कि अब अस्पताल भी न सुरक्षित रहा और न ही भरोसेमंद!

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