इन विदेशी छात्रों ने अपनाया हिंदी नाम, हिंदी सीखने आए थे भारत

author image
Updated on 16 Sep, 2016 at 11:32 am

Advertisement

महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में दुनियाभर से हर साल करीबन 40 विदेशी छात्र हिंदी सीखने आते हैं।

hindi

हिंदी के इस अध्ययन के दौरान प्रत्येक छात्र का हिंदी में नया नाम रखा जाता है। कुछ छात्रों को अपने यह नए नाम इतने पसंद आते है कि वह विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद भी खुद को इन नामों से पहचाने जाना पसंद करते हैं। हिंदी भाषा से प्रभावित हो यह छात्र अपना नाम हिंदी में ही रख लेते हैं।

यही कारण है कि यहां पढ़ रही एक चीनी छात्रा चेनवै जो अब दीक्षा, और चीन से ही आया एक और छात्र चुई फांमिंग आशीष के नाम से पहचाने जाते हैं।

diksha

इसी तरह से थाईलैंड के शगभिरि सुवर्ण दिव्य और चीन की तान श्यूरान करीना नाम अपना चुकी हैं।


Advertisement

दुनियाभर में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से 2001 में वर्धा में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। यहां हर साल हिंदी पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित होता है।

ashish



इन विदेशी छात्रों के लिए हिंदी का अध्यन करने का मुख्य उद्देश्य देश की संस्कृति और धार्मिक महत्व को समझना है। हिंदी भाषा दुनिया भर के लगभग 30 देशों में पढ़ी व लिखी जाती है।

इस साल विश्वविद्यालय में चीन, मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, इटली, जापान, बेल्जियम, अमेरिका और स्कॉटलैंड देशों से 43 छात्रों ने दाखिला लिया है। यह सभी छात्र हिंदी से जुड़े छह महीने से एक साल तक के कोर्स करने के लिए भारत आए हैं।

चीन की दीक्षा बताती है कि उन्हें हिंदी इतनी पसंद है कि अब वह इस विषय की शिक्षक बनना चाहती हैं।

थाईलैंड के सुवर्ण दिव्य बताते हैं कि अब वह 200 छात्रों को हिंदी पढ़ाते हैं, साथ ही हिंदी और थाई साहित्य को लेकर रिसर्च कर रहे हैं।

hindi

वहीं चीनी स्टूडेंट करीना का कहना है कि वह एक ट्रांसलेटर बनना चाहती है,  ताकि भारत और चीन के साहित्य को जन-जन तक पहुंचा सके।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement