कोहरे से बनाते हैं बीयर को लाजवाब

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Updated on 30 Sep, 2015 at 7:41 pm

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बीयर में कोहरे और ओस की बून्दें? आप भी सोच रहे होंगे कि यह क्या बात हुई? लेकिन बीबीसी की  रिपोर्ट के मुताबिक चिली की एक बीयर निर्माता कम्पनी अपने बीयर उत्पादों में ओस की बून्दों को मिलाकर इसे स्पेशल बना देती है। और मजे की बात तो यह है कि यह सब एक रेगिस्तानी इलाके में हो रहा है।

Fog Catcher Brewery एक छोटा यूनिट है, जहां साल भर में सिर्फ 24 हजार लीटर बीयर का उत्पादन होता है। इसके निर्माता माइगल कर्करो बताते हैंः

“यहां बनने वाले बीयर की खासियत है कि इसमें बादलों में तैयार हो रही पानी की बून्दें मिली होती हैं। इन बून्दों की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है और इससे बीयर का स्वाद अनोखा हो जाता है। कोहरे से पानी निकालने के लिए सस्ती विधि का उपयोग करते हैं।”

आपको आश्चर्य हो रहा होगा कि धूंध या ओस की बून्दों को संग्रहित कैसे करते हैं। चिली के अटाकामा रेगिस्तानी इलाके में 0.1 मिलीमीटर से भी कम बारिश होती है। यहां बारिश भले ही कम होती है, लेकिन बादलों में आर्द्रता और नमी होती है। ये बादल पानी की ऐसी हल्की बून्दों से बने होते हैं, जो बारिश के साथ जमीन पर नहीं उतरते। इन बादलों को स्थानीय भाषा में कामनचाका कहा जाता है।


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वर्ष 1956 में जब चिली सूखे की मार झेल रहा था, तभी कार्लोस एसपिनोसा अरन्सीबिया नामक वैज्ञानिक पहली बार फॉग कैचर का आइडिया लेकर आए थे। उन्हें अपनी पहली कोशिश में करीब 1 mm पानी निकालने में सफलता मिली थी।

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कोहरे की छोटी-छोटी बून्दों को जाल के जरिए इकट्ठा किया जाता है, जहां से ये बड़ी बून्दों में तब्दील होकर एक जगह जमा होते रहते हैं। यहां से इन्हें पाइप के जरिए यूनिट तक भेजा जाता है, ताकि इनका इस्तेमाल किया जा सके।

40 स्क्वैयर मीटर के फॉग कैचर बनाने में करीब एक हजार से 15 सौ डॉलर तक की लागत आती है। और सबसे अच्छी बात तो यह है कि पर्यावरण पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।

मतलब कि आम के आम और गुठलियों के भी दाम।

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