विशाल झील और तैरते हुए असंख्य द्वीपः लोकतक सरोवर के ये दृश्य बड़े ही मनभावन हैं।

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12:00 pm 30 Oct, 2015

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लोकतक झील को दुनिया की एकमात्र तैरती हुई झील कहा जाता है क्योंकि यहां छोटे-छोटे द्वीप पानी में तैरते हैं। ये द्वीप मिट्टी, पेड़-पौधों और जैविक पदार्थों से मिलकर बनते हैं और इन्हें फुमदी कहा जाता है।

इन द्वीपों या भू-खंडों ने झील के एक बड़े भाग को ढंका हुआ है और यह करीब 40 स्क्यावयर किलोमीटर तक फैला हुआ है। लोकतक झील मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 39 किलोमीटर दूर स्थित है।

जैव विविधता से भरपूर है लोकतक

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह झील जैव विविधता से भी परिपूर्ण है और यहां एक अभयारण्य भी है। इस झील में पानी के पौधों की तकरीबन 233 प्रजातियां, पक्षियों की 100 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा किबुल लामिआयो नेशनल पार्क नामक इस अभयारण्य में जानवरों के 425 प्रजातियां भी हैं।


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भारतीय पाइथन, सांभर और दुर्लभ सूची में दर्ज भौंकने वाले हिरण इस अभयारण्य में मिलते हैं। इन हिरणों को मणिपुरी भाषा में संगई कहा जाता है। इस तैरती झील पर टूरिस्ट कॉटेज बनाए गए हैं, जहां पर्यटक इस अनोखे अहसास को जी सकते हैं।

आर्थिक विकास में योगदान

लोकतक झील मछुआरों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण स्त्रोत है। स्थानीय भाषा में इन मछुआरों को फुमशोंग्स कहा जाता है। आमतौर पर फुमदी का उपयोग ये मछुआरे मछली पकड़ने और बस्ती बसाने के लिए भी करते हैं।

इसके अलावा लोकतक झील का मणिपुर के आर्थिक विकास में भी अहम योगदान है। इस झील के पानी का उपयोग जलविद्युत परियोजनाओं, सिंचाई और पीने के पानी के लिए किया जाता है। माना जाता है कि करीब एक लाख से अधिक लोग इस झील पर आश्रित हैं।

पर्यटन के लिहाज से यह स्थान अद्वितीय है।


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