पाकिस्तान ने पहली बार वाघा बॉर्डर पर उतारा अपना सिख सैनिक

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Updated on 9 Jan, 2016 at 12:09 pm

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पाकिस्तान ने पहली बार अपने सिख सैनिक को वाघा बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी के लिए तैनात किया है। गुरुवार की शाम को इस सेरेमनी के दौरान जब इस पाकिस्तानी जवान अमरजीत सिंह ने भारतीय सैनिकों से हाथ मिलाया, तब दोनों तफ से तालियां बज उठीं। गुरुनगरी ननकाना साहिब के रहने वाले अमरजीत वर्ष 2009 से पाकिस्तान रेन्जर्स में हैं और इसी साल ट्रेनिंग पूरी की है।

हरचरण सिंह हैं पाकिस्तानी सेना में शामिल होने वाले पहले सिख

हरचरण सिंह पहले सिख हैं, जो पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए थे। ननकाना साहिब के रहने वाले सिंह ने वर्ष 2005 में सेना ज्वाइन किया था। इससे पहले पाकिस्तानी सेना में कोई सिख नहीं था। वहीं, वर्ष 2009 में हिन्दू नागिरक ज्ञानचंद ने पाकिस्तानी फॉरेन सर्विस ज्वाइन की थी। वर्ष 2013 में एक हिन्दू सैनिक अशोक कुमार ने पाकिस्तानी सेना की तरफ से लड़ते हुए वजीरिस्तान में अपनी जान गंवा दी थी। लेकिन पाकिस्तान आर्मी ने उसे शहीद का दर्जा देने से इन्कार कर दिया था।

यह होता है बीटिंग द रिट्रीट

बीटिंग द रिट्रीट की परम्परा वर्ष 1959 में वाघा बॉर्डर पर शुरू की गई थी। इसके तहत हर शाम भारत और पाकिस्तान का ध्वज उतारने का प्रोग्राम होता है। इस परम्परा को देखने के लिए हर शाम हजारों की तादाद में लोग बॉर्डर पर जुटते हैं। यह सेरेमनी करीब 156 सेकेन्ड चलती है।

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