इस ‘भारतीय’ ने किया था ATM मशीन का आविष्कार, 1967 में पहली बार निकाले गए थे पैसे

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Updated on 18 Dec, 2016 at 9:06 pm

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नोटबंदी के इस दौर में बैंकों के साथ-साथ देशभर के एटीएम की भी अहम भूमिका रही है। एटीएम के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग अपना पैसा निकालने के लिए एटीएम का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

लेकिन सोचिए अगर ऑटोमेटेड टेलर मशीन यानी कि एटीएम नहीं होता तो हमें पैसे निकालने के लिए बैंकों के सामने लंबी कतारे लगानी पड़ती, बैंक के खुलने का इंतजार करना पड़ता। जिस दिन बैंक बंद होते, उस दिन किसी आपदा स्थिति में पैसों की जरूरत पडने पर हम यहां से वहां दौड़ते रहते। लेकिन एटीएम का आविष्कार कर एक शख्स ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया, जिससे चौबीसों घंटे कभी भी हमें पैसे निकालने की सुविधा मिली। उस शख्स का एक यह आविष्कार आज के दौर में हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गया है।

इस एटीएम मशीन को बनाने वाले शख्स के तार भारत से जुड़े है, जिनका नाम है जॉन शेफर्ड बैरन। एटीएम मशीन बनाने वाले स्कॉटलैंड के जॉन शेफर्ड बैरन का जन्म 23 जून, 1925 को भारत में मेघालय के शिलॉन्ग में हुआ था।

स्कॉटलैंड से ताल्लुक रखने वाले उनके पिता उस समय उत्तरी बंगाल में चटगांव पोर्ट कमिश्नर्स के चीफ इंजीनियर थे।


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जॉन शेफर्ड बैरन telegraph

जॉन शेफर्ड बैरन के दिमाग में एटीएम को बनाने के विचार के पीछे की कहानी दिलचस्प है। एक बार हुआ यूं कि बैरन पैसे निकालने के लिए बैंक गए, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही बैंक बंद हो गया।



फिर एक दिन ऐसे ही उनके दिमाग विचार आया कि यदि चॉकलेट निकालने वाली मशीन की तरह पैसे निकालने वाली मशीन भी हो, जिससे 24 घंटे पैसे निकाल सकें तो कितनी आसानी होगी। बस फिर क्या, बैरन ने कड़ी मेहनत करते हुए आखिरकार एटीएम का निर्माण कर, इंसानी जिंदगी और पैसे का खेल पूरी तरह बदल दिया।

लंदन में बारक्लेज बैंक की एक शाखा में 27 जून 1967 में दुनिया का पहला कैश देने वाला एटीएम लगा, जिसे जॉन शेफर्ड बैरन ने विकसित किया था।

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पहली कैश मशीन का शुभारम्भ होते हुए tqn

जहां तक बात है एटीएम पिन की तो बैरन एटीएम का पिन 6 डिजिट का रखना चाहते थे, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें 6 के बजाए चार डिजिट का पिन रखने का सुझाव दिया जिसे लोगों को याद रखने में आसानी होगी। फिर बैरन ने चार डिजिट का एटीएम पिन बनाया। तब से लेकर अब तक चार डिजिट का पिन नंबर ही चलन में है।

आपको बता दें कि भारत में पहला एटीएम साल 1987 में  हॉन्गकॉन्ग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (HSBC) ने मुंबई में लगाया था।

2010 में 84 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह चुके जॉन शेफर्ड बैरन ने पूरी दुनिया को अपने एटीएम के आविष्कार के जरिए, आधी रात हो या सुबह, जब चाहे जरूरत पड़ने पर एटीएम मशीन से पैसे निकालने की सुविधा दी।

 


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