पिता-पुत्री की इस जोड़ी ने एक साथ माउंट एवरेस्ट फतेह कर कायम की मिसाल

Updated on 24 May, 2018 at 1:27 pm

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पहाड़ चढ़ना सबसे मुश्किल कामों में गिना जाता है और बात जब माउंट एवरेस्ट की हो, तो ये नामुमकिन की श्रेणी में ही है। गिने-चुने लोग ही दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई कर पाते हैं। कई पर्वतारोही ने अपने जान की बाजी तक लगा देते हैं, लेकिन चढ़ाई मुमकिन नहीं कर पाते। माउंट एवरेस्ट पर सबसे पहले 29 मई 1953 को न्यूज़ीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाली मूल के भारतीय नागरिक तेनसिंह शेरपा ने सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

 

बछेंद्री पाल पहली भारतीय महिला पर्वतारोही रहीं, जिन्होंने एवरेस्ट पर कदम रखा।

 


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एवरेस्ट चढ़ने का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। तमाम लोग एवरेस्ट को फतेह करने की उम्मीद लिए आते हैं। कई बाजी जीत जाते हैं तो कई विफ हो जाते हैं। हालांकि, गुरुग्राम के अजीत बजाज की कहानी थोड़ी जुदा है, जिन्होंने अपनी 24 वर्षीय बेटी दीया बजाज के साथ माउंट एवरेस्ट की सफ़ल चढ़ाई की है।

 

 

यह पहली भारतीय पिता-पुत्री की जोड़ी है, जिसने एवरेस्ट फतेह किया है। अपनी बेटी दीया के साथ पठानकोट के अजीत बजाज ने बीते बुधवार सुबह 4:30 बजे विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट ऐवरेस्ट पर चढ़ाई कर भारत का नाम रौशन किया है। उन्होंने दुनिया को संदेश दिया है कि बेटियां ख़ास होती हैं और वे हर मुश्किल काम कर सकती हैं।



 

बेहद दिलचस्प है कि पिता-पुत्री की यह जोड़ी यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर चढ़ाई कर ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने हैं। इसके अलावा अजीत मई 2011 में ग्रीनलैंड आइस कैप में स्की करने के साथ ही साल 2012 में नार्थ पोल और साउथ पोल पर चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं।

 

 

इन तमाम कीर्तिमानों की वजह से अजीत को भारत सरकार पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है।

अजीत बजाज पेशे से व्यवसायी हैं और वे इस समय ऋषिकेश में एडवेंचर स्पो‌र्ट्स गुड्स का व्यापार करते हैं, जिसमें बेटी दीया उनका साथ देती हैं।


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