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उपवास है सेहत के लिए अच्छा; विज्ञान ने भी लगाई मुहर, अध्ययन पर मिला नोबेल पुरस्कार

Updated on 10 December, 2016 at 5:27 pm By

जापान के योशिनोरी ओहसुमी को ‘ऑटोफैगी’ से संबंधित उनके अध्ययन के लिए इस साल के नोबेल चिकित्सा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जिस विशेष अध्ययन के लिए उन्हें नोबेल दिया गया है, उसका भारत से विशेष संबंध है।

भारत में उपवास रखना एक विशेष संस्कार है, जिसे यहां के लोग युगों से करते आ रहे हैं। साधारण शब्दों में उपवास की यह प्रक्रिया किस तरह काम करती है, इसका पता लगाने के लिए ही ओहसुमी को नोबेल पुरस्कार दिया गया है।


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nobel prize

क्या आपने ऑटोफैगी के बारे में सुना है? सरल भाषा में इसे अगर बताएं तो यह शरीर विज्ञान की एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कोशिकाएं शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ‘‘खुद ही खा जाती हैं।” यह प्रक्रिया कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त हिस्से के सही पुनर्चक्रण के लिए जरूरी है। साथ ही यह प्रक्रिया पोषक तत्वों के अभाव में शरीर को उर्जावाहक बंनाने में मदद करती है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करती है।

दूसरे शब्दों में कहे तो अगर आप एक संक्षिप्त अवधि तक खाना न खाए, तो भी आपका शरीर काम करना बंद नहीं करता है। इसका कारण है कि कुछ न खाने के दौरान कोशिकाएं मृत कोशिकाओं से ऊर्जा एकत्र करती है, जिससे शरीर उपवास के दिनों में भी और दिनों की तरह ही सामान्य रूप से काम करता है।

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ऑटोफैगी की अक्सर पुनर्चक्रण की प्रक्रिया से तुलना की जाती है। टोक्यो प्रौद्योगिकी संस्थान के ओहसुमी ने कई प्रयोग किए, जिन्होंने उन  सभी पहले की वैज्ञानिक धारणाओं को खारिज कर दिया कि जो कोशिकाएं बनती हैं, वे क्षतिग्रस्त होती हैं।

अब ओहसुमी की इस खोज ने शारीरिक विज्ञान की बहुत सारी प्रक्रियाओं में ऑटोफैगी के महत्व की समझ का रास्ता खोल दिया जैसे कि उपवास में कोशिकाएं शरीर को स्वाभाविक रूप से स्वच्छ रखने में मदद करती हैं।

Autophagy

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्क मैटसन का कहना है कि उपवास वास्तव में मस्तिष्क के विकास को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। मैटसन बताते हैं कि जब शरीर की कोशिकाएं ऑटोफैगी की प्रक्रिया शुरू करती हैं तब हमारा मस्तिष्क अधिक सतर्क हो जाता है, जो बिना खाए हुए भी इंसानी शरीर को किसी स्वास्थ्य संकट से दूर रखता है।


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अध्ययनों के आधार पर कहा गया है कि अगर नियंत्रित तरीके से कुछ समय का उपवास रखा जाए, तो इससे न सिर्फ बढ़ते वजन को घटाने, बल्कि तमाम स्वास्थ्य संबंधी फायदे हो सकते हैं।

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