रेलवे ने नहीं दिया मुआवजा तो कोर्ट ने किसान के नाम कर दी शताब्दी एक्सप्रेस

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Updated on 18 Mar, 2017 at 4:08 pm

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ये मामला आपको सुनने में जरूर अटपटा लग सकता है लेकिन ये वाकई सच है। लुधियाना के एक किसान को अदालत ने शताब्‍दी ट्रेन का मालिक बना दिया है।

दरअसल हुआ कुछ यूं कि रेलवे की ओर से जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा न मिलने पर 45 वर्षीय किसान संपूर्ण सिंह को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

इस पर फैसला सुनाते हुए जिला अदालत ने कहा कि स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और लुधियाना स्टेशन को पीड़ित किसान के नाम कर दिया जाए। लुधियाना के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज जसपाल वर्मा ने ट्रेन संख्या 12030 को किसान के नाम कर दिया।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला 2007 का है, जब रेलवे ने लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के निर्माण के लिए किसान संपूरण सिंह की जमीन अधिगृहित की थी। अदालत ने लाइन के लिए अधिगृहित की जमीन का मुअावजा 25 लाख रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 50 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया था।



मुआवजा बढ़ने के बाद किसान को मिलने वाली राशि की रकम 1 करोड़ 5 लाख 38 हजार 231 रुपए 51 पैसे तय हुई लेकिन रेलवे ने उसे 42 लाख रुपए का ही भुगतान किया।

जब मुआवजा राशि लंबे समय तक नहीं मिली तो मजबूरन किसान को अदालत जाना पड़ा। 2012  में संपूरण सिंह ने अदालत में केस किया जिसका फैसला 2015 में आया। अदालत ने उस वक्त फैसला किसान के पक्ष में सुनाते हुए रेलवे को ब्याज के साथ मुआवजे की रकम अदा करने का आदेश दिया था।

इतने साल बीत जाने के बाद भी जब रेलवे ने रकम का भुगतान नहीं किया, तो किसान अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए फिर से अदालत गया। इस बार अदालत ने किसान की अपील पर लुधियाना स्टेशन और स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस की कुर्की के आदेश दे दिए।

अदालत के आदेश के बाद जब स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के मालिक किसान संपूर्ण सिंह अपने वकील के साथ ट्रेन पर कब्जा लेने स्टेशन पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया। फिर किसान के वकील ने अधिकारियों को अदालत का आदेश थमाया।

आपको बता दें कि अदालत ने 18 मार्च तक का समय रेलवे विभाग को दिया है। यात्रियों को परशानी न हो, इसके लिए अगले अदालती आदेश तक ट्रेन की आवाजाही जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होनी है। उधर, किसान के वकील ने कहा है कि अगर मुआवजे की रकम नहीं मिलती है तो अदालत से जब्त की गई इस संपत्ति की नीलामी की सिफारिश की जाएगी।


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