नानाजी देशमुख से जुड़े ये 11 तथ्य शायद आप नहीं जानते होंगे!

Updated on 12 Oct, 2017 at 11:28 am

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नानाजी देशमुख को प्यार से लोग ‘नाना’ कहा करते थे। भारतीय राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उनका व्यक्तित्व विशाल था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लागू करने का उन्होंने कड़ा विरोध किया और मजबूत प्रतिद्वंदी के रूप में उभरे। नाना जीवन को लेकर अपनी दृष्टि के कारण भी जाने जाते हैं।

आइए जानते हैं नानाजी देशमुख के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य।

1. नानाजी का जन्म एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख था। बचपन में ही माता-पिता का साया उनके सर से उठ गया, जिसके बाद उनका लालन-पालन ननिहाल में ही हुआ।

2. वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे, फलतः उनकी शिक्षा-दीक्षा सीकर के महाराज द्वारा दी गई छात्रवृत्ति से संपन्न हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल होने से पहले तक उन्होंने बिड़ला स्कूल से पढ़ाई की जो आज बिट्स पिलानी के नाम से मशहूर है।

3. नानाजी देशमुख लोकमान्य तिलक से खासे प्रभावित थे। उनके आदर्श और सीख के कारण ही उन्होंने समाज सेवा का रास्ता चुना।

4. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवर, जो कि नाना के पारिवारिक मित्र थे, ने उन्हें आरएसएस में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। हेडगेवर की मृत्यु के बाद उनसे प्रभावित होकर अनेकों छात्रों ने आरएसएस ज्वाइन किया। नानाजी ऐसे विरले लोगों में से थे, जिन्होंने जीवनभर संघ के लिए काम किया।

5. नानाजी ने देश में आधुनिक शिक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। ये उनका की प्रयास था कि 1950 में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना गोरखपुर में की गई।


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6. नानाजी के प्रयास का ही प्रतिफल था कि उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने एक मंच पर आकर 1967 में पहली गैर-कांग्रेस सरकार बनाई।

7. इसके बाद ही दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और नानाजी देशमुख की तिकड़ी ने जनसंघ की नींव रखी। ये दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि थी कि वाजपेयी की भाषण देने की क्वालिटी और नानाजी के सांगठनिक प्रतिभा को मिलाकर एक बड़ी पार्टी खड़ी कर दी गयी।

8. ये नानाजी की महानता ही थी कि उन्हें अपनी पार्टी के साथ-साथ विपक्ष के नेतागण भी उतने ही सम्मान देते थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चन्द्र कुमार गुप्ता जो कि उनसे चुनाव हार गए थे, नानाजी का बहुत सम्मान करते थे। उन्होंने नानजी को ‘नाना फड़नवीस’ की उपाधि प्रदान की थी।

9. सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद नानाजी ने अपने को सामजिक कार्यों में लगा दिया। वे गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए किए अपने कार्यों के लिए आज भी स्मरण किए जाते हैं।

10. भारत का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना उन्होंने ही की थी। वह इसके चांसलर भी रह चुके थे।

11. उनके द्वारा किए सामाजिक कार्यों को देखते हुए 1999 में भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सामाजिक कार्यों में उनके समर्पण के कायल थे। इस महान आत्मा की मृत्यु फरवरी 2010 में हो गई।

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