‘क्रांतिकारी’ फिदेल कास्त्रो चाहते थे भारत में पैदा होना, जानिए ऐसे ही कुछ रोचक तथ्य

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Updated on 27 Nov, 2016 at 6:33 pm

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क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री फिदेल कास्त्रो का शनिवार को निधन हो गया। 90 वर्षीय कास्त्रो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। करीब 50 साल तक अमेरिका की आंखों की किरकिरी रहे फिदेल कास्त्रो अमेरिकी व्यवस्था के खिलाफ चुनिंदा बोलने वालों में से एक थे। वह दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में ही शुमार नहीं थे, बल्कि साम्यवादी व्यवस्था के स्तंभ थे, जो सोवियत संघ टूटने के बाद अपनी अंतिम सांसें ले रहा था।

फिदेल कास्त्रो का भारत से बहुत गहरा रिश्ता था। इतिहासकारों के मुताबिक कास्त्रो को भारत से असीम प्रेम और स्नेह था। वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से बहुत प्रवाभित थे और उनके बारे में कहते थे कि वह उनका एहसान कभी नहीं भूल सकते हैं। कास्त्रो अपने पीछे कई रोचक तथ्य छोड़कर गए हैं। आइए आपको बताते हैं कास्त्रो से जुड़ी खास बातें।

1.  फिदेल कास्त्रो दुनिया के तीसरे ऐसे नेता थे, जिन्होंने किसी देश पर लंबे समय तक राज किया हो। उन्होंने साल 1959 में सत्ता संभाली थी और साल 2008 में सत्ता अपने भाई को सौंपी।

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2. पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से शुरू हुआ उनका भारत से दोस्ती का सिलसिला इंदिरा गांधी तक प्रगाढ़ रूप में कायम रहा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी है।

3. फिदेल कास्त्रो को क्यूबा में कम्युनिस्ट क्रांति का जनक कहा जाता है।

4. भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह बताते हैं कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहाः

“क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयार्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया? महान जवाहरलाल नेहरू। कास्त्रो ने बताया कि, मेरी उम्र उस समय 34 साल थी। मेरे पास अंतरराष्ट्रीय राजनीति का कोई तजुर्बा नहीं था। नेहरू ने मेरा हौसला बढ़ाया, जिसकी वजह से मुझमें ग़ज़ब का आत्मविश्वास जगा। मैं ताउम्र नेहरू के उस एहसान को नहीं भूल सकता।”

पंडित नेहरू और फ़िदेल की उस मुलाक़ात के बाद भारत के लिए उनके मन में जो सम्मान और स्नेह पैदा हुआ उसमें कभी कमी नहीं आई।



5. कास्त्रो के नाम संयुक्त राष्ट्र में सबसे लंबा भाषण देने का गिनीज रिकॉर्ड दर्ज है। कास्त्रो ने 29 सितंबर 1960 को संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे 29 मिनट का भाषण दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने क्यूबा में 1986 में 7 घंटे 10 मिनट का भाषण दिया था।

6. साल 1959 में क्यूबा के तानाशाह फुलखेंशियो बतीस्ता को सत्ता से हटाकर फ़िदेल कास्त्रो ने क्यूबा में कम्युनिस्ट सत्ता कायम की थी। इसके बाद फ़िदेल कास्त्रो को करीब चार दशक तक अमेरिका विरोधी के तौर पर देखा गया।

7. बताया जाता है कि फिदेल कास्त्रो को अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी ने 638 बार मारने की प्लानिंग की थी। इसमें जहर की गोलियां, जहरीला सिगार, जहरीला सूट पहनाने जैसे प्लान शामिल थे, लेकिन कास्त्रो हर बार बच निकले।

8. साल 1960 में संयुक्त राष्ट्र संघ की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर फिदेल कास्त्रो न्यूयॉर्क पहुंचे थे। लेकिन वहां का कोई होटल उन्हें अपने यहां रखने के लिए तैयार नहीं था। बाद में न्यूयॉर्क के टेरेसा होटल ने उन्हें रहने की जगह दी। जहां उनसे सबसे पहले पंडित जवाहर लाल नेहरू मिलने गए थे और फिदेल कास्त्रो का उत्साह बढ़ाया था।

9. अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को 45 साल तक झेलने वाले कास्त्रो ने आइजनहावर से लेकर क्लिंटन तक 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों का सामना किया। जॉर्ज डब्ल्यू बुश के शासनकाल में उन्हें सबसे ज्यादा विरोध का सामना करना था।

10. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के मुताबिक, फिदेल कास्त्रो, इंदिरा गांधी को अपनी बड़ी बहन मानते थे। वहीं, फिदेल के 8 बच्चे हैं। उनके बड़े बेटे फिदेल कास्त्रो डियाज बलार्ट को उनके पिता की झलक माना जाता है।

11. वह अपनी पूरी ज़िंदगी हरे रंग की मिलिट्री पोशाक पहने रहे।

12. 1962 में शीत युद्ध के दौरान फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ को अपनी सीमा में अमेरिका के खिलाफ मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर दुनिया को सकते में ला दिया था। कास्त्रो के इस कदम ने दुनिया को परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला दिया था। मॉस्को ने अमेरिका से महज 144 किलोमीटर दूर स्थित आइलैंड पर मिसाइल तैनात करने की मंजूरी मांगी थी।

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13. फिदेल कास्त्रो ने 1980 के दशक में पेट प्रॉजेक्ट शुरू किया। इसके तहत ‘उब्रे ब्लैंका’ नस्ल की गाय के एक दिन में 110 लीटर दूध देने का गिनेस रेकॉर्ड बना।

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