रियल ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम के बारे में 11 दिलचस्प बातें

Updated on 13 Feb, 2018 at 5:26 pm

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महिलाओं के हाइजीन के मुद्दे पर टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी फिल्म बनाने के बाद अक्षय कुमार की दूसरी फिल्म पैडमैन मेन्स्ट्रुअल हाइजीन पर आधारित है। रिलीज़ के पहले से ही यह फिल्म काफ़ी सुर्खियां बंटोर चुकी हैं और लोग अक्षय कुमार की बहुत तारीफ कर रहे हैं, लेकिन अक्षय की फिल्म जिस रियल पैडमैन पर आधारित है, क्या आप उन्हें जानते हैं?

दरअसल, अक्षय की ये फिल्म अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िंदगी पर आधारित है। मुरुगनाथम ने अपने गांव की महिलाओं को सस्ते सैनिटरी पैड्स मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी उठाई। जहां अधिकांश पुरुष इस मुद्दे पर बात तक करने से हिचकिचाते हैं, वहीं मुरुगनाथम ने पीरियड्स के दौरान अपनी पत्नी को गंदे कपड़े इस्तेमाल करते देख, इस मुद्दे पर कुछ करने की सोची और तमाम मुश्किलों के बाद वो सस्ते पैड्स बनाने में सफल रहे।


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1. मुरुगनाथम बहुत ही गरीब परिवार से हैं। उनके पिता कोयम्बतूर में हथकरघा बुनकर थे। मुरुगनाथम की पढ़ाई में मदद के लिए उनकी मां खेतों में मज़दूरी करती थी।

2. 14 साल की उम्र में ही मुरुगनाथम ने पढ़ाई छोड़ दी और कई तरह के काम करने के बाद वो एक फैक्ट्री में खाना सप्लाई करने का काम करने लगे। अपने परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने मशीन टूल ऑपरेटर, सेलिंग एजेंट मजदूर और वेलडर जैसे कई काम किए।

 

 

3. 1998 में मुरुगनाथम की शादी हो गई। शादी के बाद उन्होंने देखा की उनकी पत्नी पीरियड्स के दौरान गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करती थी, क्योंकि सैनेटरी पैड्स खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। पत्नी की परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने सस्ते पैड्स बनाने के लिए प्रयोग शुरू कर दिया।

 

4. मुरुगनाथम ने पहले रूई के इस्तेमाल का आइडिया दिया, लेकिन उनकी पत्नी और बहन ने इसे रिजेक्ट कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने मुरुगनाथम की मदद करने से भी मना कर दिया।

 

 

5. पैड्स बनाने के शुरुआती दौर में उन्होंने महिला स्वयंसेवी खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए, क्योंकि भारत में मनेस्ट्रुएशन पर बात करना अपने आप में खराब माना जाता है। जब किसी महिला का साथ नहीं मिला तो उन्होंने पैड्स बनाकर खुद ही ट्राई करना शुरू कर दिया, इसकी वजह से आसपास के लोगों ने उनका मज़ाक बनाना शुरू कर दिया।

 



6. तमाम विरोध के बावजूद उन्होंने काम जारी रखा और अपने बनाए पैड्स के विश्लेषण के लिए उन्होंने उसे लड़कियों के स्थानीय मेडिकल कॉलेज में फ्री पैड्स बांटे। कुछ साल बाद उन्हें पता चला कि पैड्स कंपनियां पाइन के छाल से उत्पन्न सेल्यूलोज फाइबर का इस्तेमाल पैड्स में करती हैं, जिससे वो नमी को अवशोषित कर लेती हैं और पैड का शेप भी नहीं बदलता।

7. मुरुगनाथम सस्ती कीमतों पर पैड्स बनाना चहाते थे, इसके लिए उन्होंने एक ऐसी सस्ती मशीन बनाई जिसे चलाने के लिए कम से कम प्रशिक्षण की ज़रूरत थी। उन्हें मुंबई से प्रोसेस्ड पाइनवुड पल्प की सप्लाई भी मिल गई।इस मशीन की कीमत करीब 65 हजार रुपए है।

 

 

8. 2006 में आईआईटी मद्रास की यात्रा के दौरान, उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के ग्रासरूट्स टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवार्ड के लिए पंजीकृत किया गया और उन्होंने ये अवॉर्ड जीता भी।

 

 

9. इसके बाद से मुरुगनाथम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सीड फंडिंग मिलने के बाद जयश्री इंडस्ट्रीज़ की स्थापना की। यह संस्था ग्रामीण इलाकों में पैड्स बनाने वाली मशीन बेचती है। इस मशीन की कम कीमत और बेहतरीन कार्यतक्षमता की वजह से इसकी बहुत तारीफ हुई है।

 

 

10. मुरुगनाथम की पैड्स बनाने वाली मशीन ने बड़ी संख्या में महिलाओं को रोज़ागार दिलाया। उनके प्रयास से प्रेरित होकर कुछ अन्य लोग भी इस बिज़नेस में आए। लोगों के जुड़ने से नए विचार भी आए।

 

 


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11. 2014 में मुरुगनाथम का नाम टाइम मैगज़ीन के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल हो चुका है। उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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