बेसहारा ग़रीब बच्चों को नई जिन्दगी दे रहे हैं व्हीलचेयर पर चलने वाले कैप्टन नवीन गुलिया

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Updated on 19 Mar, 2016 at 9:35 pm

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“एक व्यक्ति को सशक्त करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उससे सब कुछ छीन लें। जब आपके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचता, तो वहां कोई डर नही बचता।”

कैप्टन नवीन गुलिया व्हीलचेयर पर बैठे जब मुस्कुराते हुए ऐसा कहते हैं, तो विश्वास हो जाता है कि ऐसा कुछ भी नही है जो किया नहीं जा सकता। परिस्थितियां भले ही आपके अनुकूल न हो, लेकिन इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है।

कैप्टन गुलिया का बचपन से ही सपना था कि वह देश के लिए कुछ करें और उनका यही सपना उन्हें सेना में पैरा कमांडो की ट्रेनिंग की तरफ ले गया। लेकिन चार साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह एक प्रतियोगिता के दौरान अधिक ऊंचाई से गिर पड़े और इस दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई।

दो साल तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद जब डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि वह अब चल-फिर नहीं सकते। इसके बाद नवीन ने उन सारी सीमाओं को चुनौती दी, जो उनके देश के लिए कुछ कर गुज़रने के ज़ज़्बे के बीच में आई।

हालांकि नवीन के कंधों के नीचे के हिस्से उनका भार सहने में सक्षम नही है, परंतु अपने व्हीलचेयर के जरिए वह ऐसे बच्चों का भार उठा रहे हैं, जिनका कोई नहीं। आज, नवीन उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणासोत्र हैं, जो किसी दुर्घटना की वजह से अक्षम हैं। नवीन कहते हैं किः

“मैने अपने आप को सिखाया कि ‘मैं जो था उसपर मुझे गर्व होना चाहिए। फिर मैनें खुद को उस गौरव के लायक बनाने के लिए तरीके खोजने शुरू कर दिए।”

कैप्टन नवीन गुलिया ने एक संस्था ‘अपनी दुनिया, अपना आशियाना’ की शुरुआत की। नवीन का ऐसी संस्था शुरू करने के पीछे मकसद था कि उन सैकड़ों ग़रीब बच्चों के लिए न सिर्फ शिक्षा मुहैया कराया जाए, बल्कि उनको काबिल बनाने के लिए हर वह मदद प्रदान किया जाए, जो उन बच्चों के माता-पिता नही कर सकते थे। नवीन गुलिया इस संस्था के मकसद पर कहते हैंः

“सर्दियों की एक धुंध भारी रात थी। मैनें सड़क पर एक 2 साल की बच्ची के रोने की अवाज सुनी। उसके शरीर पर नाम मात्र के कपड़े थे। उसको कुछ बच्चे अपने साथ लेकर आए थे, जो आसपास ही खेल रहे थे। मैनें उन बच्चों को खोजा और उनको डांट लगाई कि क्यों उन्होंने बच्ची को इस तरह छोड़ा हुआ है। बाद में वे उस बच्ची को लेकर वहां से चले गए। मैने सोचा कि क्यों न ऐसे बच्चों की मदद की जाए। उसी पल से मैने ठान लिया कि मैं गरीब बच्चों की देखभाल करूंगा।”


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कैप्टन गुलिया और उनकी संस्था गरीब बच्चों, भीख मांगने वाले बच्चों और ईंट भट्टों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए काम कर रही है। शुरुआत में उन्होने ऐसे बच्चों की मदद की जो भूखे थे। नवीन ऐसे बच्चों के लिए खाना उपलब्ध करते थे। बाद में वह ऐसे बच्चों से मिले जिनका शिक्षा के प्रति रुझान था। उन बच्चों के लिए नवीन ने स्कूल में दाखिले से लेकर उनकी किताबों तक का प्रबंध कराया।

नवीन का नाम लिम्का विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज़ है। दरअसल, शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद उन्होंने ‘मर्सिमिक ला’ नामक पर्वती चोटी तक पहुंचने के लिए 60 घंटे का सफर तय किया।

उन्होंने अपने निजी वाहन टाटा सफारी से इस साहसिक कार्य को अंज़ाम दिया। जब मंज़िल पर पहुंच कर नवीन के सहयोगी ने पूछा कि कैसा लग रहा है तो उन्होंने सुकून भरे अंदाज़ में कहाः

“अगर तुम्हारी जिन्दगी में कुछ ऐसा नही है, जिसके लिए तुम मर सकते हो तो तुम्हारी जिन्दगी बेकार है दोस्त। जिन्दगी बेहतरीन रही है और आज के बाद यह और बेहतरीन हो जाएगी।”

लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स समारोह में नवीन गुलिया संग सचिन तेंदुलकर, आमिर ख़ान, अंबानी और नीता अंबानी jagran

लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स समारोह में नवीन गुलिया संग सचिन तेंदुलकर, आमिर ख़ान, अंबानी और नीता अंबानी jagran

नवीन समाज सेवक के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी हैं। उनके द्वारा लिखी गई खुद की आत्मकथा ‘इन क्वेस्ट ऑफ दी लास्ट विक्टरी’ और ‘वीर उनको जानिए’ की पाठकों के बीच जबरदस्त मांग है।

यही नहीं, उन्होंने हरियाणा के गांव बारहाना को गोद लिया है। इस गांव का स्त्री-पुरुष अनुपात देश में सबसे कम है। यहां 1000 लड़कों पर 376 लड़कियां हैं। नवीन बताते हैं कि उनकी कोशिश है कि लड़कियों को आगे बढ़ने में मदद की जाए, ताकि वे प्रेरणा बन सकें।

2007 में शुरु होने वाली यह संस्था आज गुड़गांव और उसके आसपास रहने वाले करीब 500 बच्चों की देखभाल कर रही है। मानेसर में रहने वाला बच्चा सनी इस संस्था की मदद से दसवीं की परीक्षा में 95 फीसदी नम्बर हासिल करने में सफल हुआ है।

इसी तरह, पोलियो से ग्रस्त गीता आज एक स्कूल में अध्यापिका हैं।

नवीन को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने ‘नेशनल रोल मॉडल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। यही नहीं, उनके सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें हरियाणा गौरव अवॉर्ड, इंडियन पीपल ऑफ द ईयर अवॉर्ड, ग्लोबल इंडियन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

कैप्टन नवीन गुलिया सिर्फ़ अक्षम लोगों के लिए प्रेरणा नहीं हैं, बल्कि वह हम सभी के लिए रोल मॉडल हैं। उनसे हमें सीखना चाहिए कि मंज़िल को पाने के लिए सिर्फ़ ताक़त की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि उनको पूरा करने के लिए चाहिए लगन। लगन जो हमें अपनी भारत माता के लिए कुछ कर गुज़रने का ज़ज़्बा देती है।

ऐसे भारत के वीर सपूत को मेरा सलाम।

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