पश्चिम बंगाल में कुटीर उद्योग बन गया है देसी बम निर्माण, फिर बरामद हुआ विस्फोटकों का जखीरा

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Updated on 8 Mar, 2017 at 11:46 am

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पश्चिम बंगाल के मालदा में हुए बम धमाके में एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है, जबकि इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं। बताया गया है कि बम धमाके की यह घटना मालदा के पहारपुर गांव में हुई है। यह गांव NH 81 के नजदीक ही स्थित है।

बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए यहां से बमों का जखीरा बरामद किया है।


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बांग्लादेश की सीमा से सटा मालदा बेहद संवेदनशील इलाका है। इस क्षेत्र में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और यहां अवैध गतिविधियां अधिक होती हैं। तस्करी से लेकर आतंकवादी गतिविधियां आम हैं। पिछले साल लगातार कई दिनों तक चले साम्प्रदायिक दंगों और प्रशासन की निष्क्रियता की वजह से यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर आ गया था।

पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में जिस तरह अवैध बम धमाकों में लोगों की मौत हुई है और जिस परिमाण में यहां से विस्फोटकों का जखीरा बरामद होता रहा है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि वीरभूम, मालदा, बर्द्धमान, मुर्शिदाबाद और कोलकाता सरीखे इलाकों में देसी बम निर्माण एक कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है।

पिछले कुछ साल में यहां दर्जनों घटनाएं हुई हैं। देसी बमों का उपयोग न केवल राजनीतिक दलों के समर्थक करते हैं, बल्कि अब बंगाल को शरणस्थली बनाने वाले जिहादियों में भी यह प्रवृत्ति आम है।

वीरभूम, मालदा, बर्द्धमान, मुर्शिदाबाद सरीखे जिलों में खुलेआम बम बनाए जाते हैं और उनका उपयोग वर्चस्व की लड़ाई में अधिक होता है। इसे यहां इलाका दखल का नाम देते हैं। चुनावों के समय में इस तरह की घटनाओं में बढ़ जाती हैं।

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