बागपत के बरनावा गांव में मौजूद है महाभारत काल का लाक्षागृह !

Updated on 4 Nov, 2017 at 1:39 pm

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महाभारत में पांडवों के ‘लाक्षागृह’ में ठहरने और वहां दुर्योधन एवं मामा शकुनि के षड़यंत्र से उनको जलाकर मारने की कोशिशों की गाथा तो हमने सुन रखी है। उसी ‘लाक्षागृह’ की वैज्ञानिक अब खुदाई करने वाले हैं।

इसकी खुदाई से बहुत सारे रहस्य सामने आ सकते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बागपत जिले के बरनावा इलाके में स्थित महाभारत काल की इस जगह की खुदाई करने की मंजूरी दे दी है। स्थानीय पुरातत्वविद व इतिहास के जानकार सालों से इस स्थान की खुदाई की मांग कर रहे थे, जो अब जाकर मंजूर हो गई है। महाभारत के समय में इसे वारणा-वत कहा जाता था। यह जगह मेरठ में मौजूद हस्तिनापुर से करीब 66 किलोमीटर दूर है और अब इसी जगह पर खुदाई होगी। इस स्थान पर वर्ष वर्ष 2014 में तांबे का एक मुकुट मिला था।

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पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बतायाः

“भारतीय पुरातत्‍व विभाग ने इस ऐतिहासिक स्‍थल की खुदाई पर सहमति दी है। खुदाई का काम दिसंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगा, जो तीन महीने तक चल सकता है। इस कार्य में पुरातत्व संस्थान के छात्र भी हिस्सा लेंगे।”



रिटायर्ड एएसआई सुपरिंटेंडिंग पुरातत्वविद् के.के. शर्मा का कहना है, महाभारत से जुड़े होने के कारण इस साइट का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। कौरवों ने इस महल का निर्माण पांडवों को छलपूर्वक ज़िंदा जलाने के लिए किया था, लेकिन पांडव सुरंग के रास्ते वहां से बच निकले थे।

हालांकि, पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ एस.के. मंजुल का कहना है कि चंदायन और सिनौली जैसी महत्वपूर्ण साइट्स से निकटता के कारण इस स्थान को खुदाई के लिए चुना गया है। वर्ष 2005 में सिनौली में हुई खुदाई के दौरान हड़प्पा-काल के कब्रिस्तान का खुलासा हुआ था। पुरातत्वविदों को यहां से बड़ी संख्या में कंकाल और बर्तन मिले थे।

मुलतानी मल पीजी कॉलेज, मोदी नगर के इतिहास विभाग के सहायक प्रोफ़ेसर और संस्कृति व इतिहास संघ के सचिव कृष्ण कांत शर्मा कहते है कि आज तक किसी ने भी इस सुरंग को ठीक से नहीं देखा है। खुदाई कार्य से इस सुरंग की लंबाई सहित कई रहस्य से पर्दा उठ सकता है।


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