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हिन्दू पौराणिक कथाओं के 8 बड़े खलनायक

Published on 9 December, 2015 at 9:30 am By

भारतीय पौराणिक कथाओं में खलनायकों की तूती बोलती रही है। इन कथाओं में कई ऐसे खलनायकों का जिक्र है, जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अनुचित बल प्रयोग कर मानवता को आहत किया था। हालांकि लौकिक सत्य तो यह है कि अन्त में बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। इसे हम अपने पौराणिक कथाओं में साक्षात देखते हैं। आज हम यहां हिन्दू पौराणिक कथाओं में वर्णित उन 8 खलनायकों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनके बुरे कर्म ही उनके विनाश का कारण बने।

1. केकई:


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केकई अयोध्या के राजा दशरथ की प्रिय पत्नी थीं। माना जाता है कि राजा दशरथ अपनी तीन पत्नियों में से केकई को अधिक पसन्द करते थे, लेकिन केकई ने अपनी मान और प्रतिष्ठा का अनुचित फायदा उठाया। वह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के लिए ज़िम्मेदार बनीं। राजगद्दी को अपने बेटे भरत के लिए सुरक्षित करने के लिए केकई ने राजा दशरथ के समक्ष राम को 14 वर्ष के वनवास की जिद रखी। वह मंथरा थीं, जिसने केकई के ज़ेहन में राम के विरुद्ध विष घोला, लेकिन इस तर्क से केकई का अपराध कम नहीं होता, जिनकी वजह से राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी।

2. होलिका:

भागवत पुराण में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को एक ऐसी आसुरी के रूप में वर्णित किया गया है, जिसे अग्नि से बचने का वरदान था। उसको वरदान में एक ऐसी चादर मिली हुई थी, जो आग में नहीं जलती थी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद, जो कि भगवान विष्णु का परम भक्त था, को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई। इस योजना के तहत होलिका बालक प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर जा बैठीं, लेकिन प्रह्लाद पर भगवान विष्णु की अत्यंत कृपा थी और वह बच गए। जबकि, आग की लपटों में घिर कर होलिका जल गई और भस्म हो गई। हिन्दू होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं।

3. दुर्योधन:

दुर्योधन हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के ज्येष्ठ पुत्र थे। वह पांडवों से ईर्ष्या करते थे और उन्हें सिंहासन को लेकर कड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते थे। दुर्योधन के जन्म के दौरान संत व्याकुल थे, क्यूंकि उन्हें अनिष्ट की आशंका थी। यहां तक कि ऋषियों ने गांधारी को सलाह दी थी कि वह इस बच्चे को जन्म न दें, जो भविष्य में दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। गांधारी ने संतों की बात को नकार दिया।

4. मंथरा:



मंथरा रानी केकई की दासी थी। जब केकई का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ, तब मंथरा भी केकई के साथ ही अयोध्या आ गई। वह मंथरा ही थी, जिसके कहने पर केकई ने राजा दशरथ को राम को 14 वर्ष के वनवास भेजने के लिए विवश किया। जब कभी षड्यंत्र का ज़िक्र होता है, तब-तब मंथरा का नाम उसका पर्याय बन जाता है।

5. सूर्पनखा:

सूर्पनखा रावण की बहन थी। जंगल में भ्रमण करते समय वह राम पर मोहित हो गई। सूर्पनखा ने राम के समक्ष प्रणय निवेदन किया। राम नहीं माने तो सूर्पनखा ने उनपर हमला कर दिया। इसस क्रोधित लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काट दी। सूर्पनखा अपनी इस शिकाय को लेकर रावण के पास गईं। इस घटना से गुस्से में रावण ने सीता का अपहरण कर लिया, जो बाद में उसके विनाश का कारण बना।

6. शकुनी:

शकुनी गांधार के राजकुमार और भारतीय महाकाव्य महाभारत में वर्णित खलनायकों में से एक थे। शकुनी गांधारी के भाई थे। और इस लिहाज़ से वह दुर्योधन के मामा लगते थे। वह बेहद शातिर दिमाग थे, लेकिन उनकी योजना अनिष्ट का कारण बनीं। शकुनी को महाभारत के युद्ध का आधार माना जाता है, जिन्होंने अपने षंडयंत्रों से कौरवों और पांडवों के बीच संघर्ष कराया।

7. कंस:


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कंस मथुरा के राजा, देवकी के भाई और कृष्ण के मामा थे। कंस को लेकर यह भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी की आठवीं सन्तान उनके मृत्यु का कारण बनेगी। इस भविष्यवाणी से भयभीत कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस ने एक-एक कर देवकी के सातों संतानों को मार डाला, यहां नियति अपनी कहानी खुद लिख रही थी। देवकी ने बाल कृष्ण को जन्म दिया। कृष्ण के जन्म लेते ही लौकिक शक्ति के प्रभाव से कारावास के इर्द-गिर्द मौजूद सारे संतरी सो गए और कारावास के द्वार अपने आप खुलते गए। वसुदेव बाल कृष्ण को लेकर नन्द के घर पहुंचे, जहां उनका लालन-पोषण हुआ। बाद में भविष्यवाणी के अनुरूप कृष्ण ने कंस का वध कर दुनिया को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

8. रावण:


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असुरों का असुर। बुद्धिमानों में से सबसे अधिक बुद्धिमान। दरअसल, हिन्दू पौराणिक कथाओं में रावण की बराबरी का कोई नहीं है। वह संपूर्ण रामायण के मुख्य प्रतिपक्षी रहे, जिनका सीता-हरण अपराध भगवान राम के हाथों मृत्यु का कारण बना। रावण को धार्मिक पुराणों में अधर्म के प्रतीक के रूप में अनुष्ठित किया गया है।

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