यूरोप की वजह से भारत में है सूखा, 13 करोड़ लोग प्रभावित

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Updated on 23 Apr, 2017 at 9:04 pm

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यूरोप के प्रदूषण की वजह से भारत में सूखा है। इस बात का खुलासा एक नए अध्ययन में हुआ है।

लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने अपने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि उत्तरी गोलार्द्ध के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन की वजह से भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बारिश में 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। अकेले यूरोप के ही उत्सर्जन से यहां के दक्षिण- पश्चिमी और पश्चिमोत्तर क्षेत्र में 10 फीसदी की गिरावट आई। इस शोध के संबंध में लंदन से प्रकाशित अखबार द इन्डिपेन्डेन्ट में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

शोध में कहा गया है कि कोयले से संचालित पॉवर प्लांट से बनने वाले सल्फर डाईऑक्साइड बारिश को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से सूखा पड़ता है।

यह न केवल दिल और फेफड़े की बीमारी की बीमारी का जनक है, बल्कि पेड़-पौधों की वृद्धि पर भी असर डालता है।

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आईसीएल ग्रांथम इंस्टिट्यूट के एपोस्तोलोस वुलगाराकिस ने बतायाः



“दुनिया के एक हिस्से में होने वाला उत्सर्जन दूसरे हिस्से में कैसे प्रभाव डाल सकता है। यह शोध में पता चला है। पास में होने की वजह से पूर्वी एशिया अधिक असर डाल रहा है, लेकिन यूरोप और अमेरिका का भी असर अधिक है।”

1990 से 2011 के दौरान यूरोप में सल्फर डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में 74 फीसदी की गिरावट के बावजूद दुनिया के गर्म होने की वजह से भारत में सूखे की स्थिति बरकरार रही।


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