भारत के इन 10 मंदिरों को देखकर आप भी कहेंगे कि हमारे पूर्वज वक्त से कहीं आगे थे

Updated on 1 Aug, 2018 at 1:06 pm

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आज भले ही हम भारतीय खुद को आधुनिक कहते हैं, लेकिन सेक्स हमारे लिए आज भी एक टैबू है, जिसपर खुले में चर्चा नहीं होती, जबकि एक वक्त ऐसा था जब यहां कामसूत्र की रचना हुई थी। इस मामले में हमारे पूर्वज हमसे कहीं ज़्यादा आधुनिक थे और इसकी बानगी है खजुराहो का मंदिर। मंदिर के बाहरी दीवारों पर अंकित मूर्तियों से पता चलता है कि प्राचीन काल में सेक्स को लेकर लोग कितने सहज थे। हालांकि, आपको शायद ये पता नहीं होगा कि खजुराहो देश इकलौता मंदिर नहीं है, जहां इस तरह की मूर्तियों की कारीगरी की गई हो। हमारे देश में और भी कई मंदिर हैं जहां की स्वच्छंद मूर्तियां हमारे पूर्वजों के वक्त से कहीं आगे होने की गवाही देती है।

 

मंदिरों की कारीगरी कहीं न कहीं कामसूत्र से प्रेरित है।

 

1. राजा रानी मंदिर, भुवनेश्वर

 

उड़ीसा के भुवनेश्वर शहर में स्थित इस मंदिर को इंद्रेश्वर नाम से जाना चाहता था। वहां रहने वाले इसे प्रेम का मंदिर कहते हैं। 11वीं शताब्दी का यह मंदिर पंचरथ शैली में बना हुआ है। इस मंदिर में देवी-देवताओं, रोज़ाना के कामकाज की मूर्तियों के अलावा इसकी दीवारों पर काम में रत शैली की मूर्तियां भी बनी हुई हैं।

 

 

2. सूर्य मंदिर, कोणार्क

 

उड़ीसा के कोणार्क में एक विशाल रथ के आकार का बना सूर्य मंदिर बहुत मशहूर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण श्री कृष्ण के पुत्र सांबा ने करवाया था। कोणार्क मंदिर में भी इस तरह की मू्र्तियां बनी हुई हैं और इसे इतनी बारीकी से बनाया गया है कि आप देखकर हैरान रह जाएंगे।

 

 

3. जगदीश मंदिर, उदयपुर

 

झीलों के शहर उदयपुर में स्थित इस मंदिर को जगन्नाथ राय और जगदीश जी भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1651 में हुआ था। काले पत्थर और कई तरह के धातुओं से बना यह मंदिर विष्णु भगवान को समर्पित है और यहां की दीवारों पर भी आपको ढेर सारी कामुक मूर्तियां दिख जाएंगी।

 

 

4. खजुराहो के मंदिर, खजुराहो

 

मध्यप्रदेश में स्थित खजुराहो का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। चंदेल वंश के राजाओं द्वारा बनवाए गए 85 मंदिर में से अब सिर्फ 20 ही बचे हैं। खजुराहो के मंदिर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया है।

 

 

5. मारकंडेश्वर मंदिर, गढ़चिरौली

 

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि राक्षसों ने इस मंदिर का निर्माण सिर्फ़ एक रात में किया था। इस मंदिर के बाहर भी प्रेम में रत मूर्तियां बनी हुई हैं।


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6. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

 

भुवनेश्वर का यह मंदिर भगवान हरिहर को समर्पित है शहर का सबसे बड़ा मंदिर है। लिंगराज का शाब्दिक अर्थ है, ‘लिंग के राजा’। इस मंदिर का निर्माण 617-657 ईं के बीच हुआ था। यहां आपको कामसूत्र किताब के कई दृश्य दिख जाएंगे।

 

 

7. वीरुपाक्ष मंदिर, हम्पी

 

हम्पी बेंगलुरू से 350 किलोमीटर दूर है। यहां के वीरुपाक्ष मंदिर में भी कामुक मूर्तियां हैं। वीरुपाक्ष भगवान शिव के ही एक रूप हैं। विजयनगर साम्राज्य के देव राजा 2 के एक सरदार, लक्कन डंडेशा ने इस मंदिर को बनवाया था।

 

 

8. रणकपुर जैन मंदिर, पाली

 

राजस्थान के पाली जिले का यह मंदिर तीर्थांकर आदिनाथ को समर्पित। ये जैन मंदिर राजस्थान के पाली ज़िले का मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर में संगमरमर से बने 1400 स्तंभ और कई कामोत्तेजक मूर्तियां हैं।

 

 

9. भोरमदेव मंदिर, कबीरधाम

 

छत्तीसगढ़के कबीरधाम में स्थित भोरमदेव मंदिर का निर्माण 1100 ई. में हुआ था। कहा जाता है कि किसी तंत्र साधना करने वाले राजा ने ये मंदिर बनवाया था और यहां आपको कामसूत्र की किताब के कई दृश्य दिख जाएंगे।

 

 

10. नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा

 

उत्तराखंड के अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर बहुत मशहूर है। यह मंदिर लगभग हज़ार साल पुराना है। यहां भी ढेर सारी रति में लीन चित्र उकेरे गए हैं।

 

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