संसद के इस बिल से बॉस का खौफ खत्म, लोग ट्विटर पर जाहिर कर रहे खुशी

Updated on 12 Jan, 2019 at 12:57 pm

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भारत में वर्क-कल्चर को लेकर बहस होता रहा है और जाहिर है देश के विकास के लिए इसका होना बेहद जरूरी भी है। लेकिन जिंदगी और खुशी उससे भी बढ़कर है। वर्क-कल्चर के विकास के साथ ही उससे जुड़े तनाव भी लोगों की परेशानी का कारण बनता जा रहा है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर एक बड़ा कदम उठाया है।

इस ख़ास तरह के कानून को ‘राइट टू डिसकनेक्ट’ कहा जा रहा है!

 

 


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आज के इस भागदौड़ वाले समय में जब सूचना तकनीक हर जगह उपलब्ध है, लोग फिर भी परेशान हुए पड़े हैं। गौरतलब है कि ऑफिस के बाद भी लोग मेल या फोन पर कामकाज में लगे होते हैं। इससे न केवल उनका निजी जीवन प्रभावित होता है बल्कि उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। सुप्रिया सुले ने इसकी परवाह करते हुए बिल पेश किया है, जिसके बाद नौकरीपेशा लोगों में खुशी का माहौल है।

 

सुप्रिया सुले का कहना है,

“इस कानून के बन जाने से कोई भी कंपनी कर्मचारियों पर काम का बोझ नहीं दे सकती है। इससे लोगों में तनाव भी कम होगा और वे अपना निजी जीवन के साथ ही अपने हेल्थ का ख्याल रख सकेंगे। ये बेहद जरूरी बिल है जिससे लोग काम करने के साथ ही अपना जीवन सही से मैनेज कर सकेंगे और खुश रहेंगे।”

 

 

बिल के अनुसार, प्राइवेट जॉब हो या सरकारी, लोग ऑफिस आवर्स के बाद ऑफिशियल फोन और मेल का जवाब नहीं देंगे। ऐसा करना उनके अधिकार में शामिल हो जाएगा और लाजमी है अब बॉस भी उसे इसके लिए विवश नहीं कर सकता है। विधेयक के अनुसार, कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण की स्थापना होगी जिसमें आईटी, कम्युनिकेशन और लेबर मंत्री भी शामिल किए जाएंगे।

सांसद सुप्रिया ने इस बिल के माध्यम से एक बड़े तबके की बात उठाई है। बिल पेश होते ही नौकरी करने वाले लोगों ने ट्वीटर पर जमकर अपनी खुशी जाहिर की है।

 

लोग खुशी से मीम्स भी शेयर कर रहे हैं, ये देखिए –

बताते चलें कि केवल भारत ही नहीं, ऐसे कानून को लेकर कई देशों में चर्चा चल रही है। मालूम हो कि फ्रांस ने ऐसा कानून लागू भी कर दिया जबकि न्यूयॉर्क और जर्मनी में इस पर बहस जारी है। अगर हमारे देश में यह बिल लागू होता है तो जाहिर है प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।


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