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मातृ सत्ता के प्रतीक हैं हाथी, जानिए हाथियों के बारे में अन्य रोचक बातें

2:40 pm 12 Aug, 2017

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हाथी मातृ सत्ता के प्रतीक हैं। माना जाता है कि हाथियों के परिवार की सबसे बुजुर्ग हथिनी अपने झुंड को नियंत्रितक करती है। नर हाथी भले ही कितना भी बलशाली क्यों न हो, वह हथिनी के आदेश को मानने के लिए बाध्य होता है। हाथी को एशियाई सभ्यताओं में बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है। हाथी की स्मरण शक्ति अधिक होती है। यह बुद्धिमान भी होता है। हाथी की बुद्धिमानी की तुलना अक्सर डॉल्फिन व वनमानुषों से होती है।

हाथी की मुख्यतः दो प्रजातियां जीवित हैं। एक है लॉक्सोडॉण्टा तथा दूसरा है ऍलिफ़स। लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति के हाथी अफ्रीका में पाए जाते हैं, जबकि ऍलिफ़स मूलतः एशिया में। लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति की दो जातियां हैं- लॉक्सोडॉण्टा ऍफ़्रिकाना और लॉक्सोडॉण्टा साइक्लॉटिस।

लॉक्सोडॉण्टा ऍफ़्रिकाना आमतौर पर अफ्रीका के खुले मैदानों में रहते हैं, जबकि लॉक्सोडॉण्टा साइक्लॉटिस जाति के हाथी घने वर्षावनों में पाए जाते हैं। इन हाथियों को शिकारियों से लगातार खतरा बना हुआ है।

ऍलिफ़स प्रजाति को मूलतः चार जातियों में वर्गीकृत किया गया है। भारतीय हाथी (ऍलिफ़स मैक्सिमस इन्डिकस), श्रीलंकाई हाथी (मैक्सिमस मैक्सिमस), सुमात्रा के हाथी (ऍलिफ़स मैक्सिमस सुमात्रेनस) तथा बॉर्निया के हाथी (ऍलिफ़स मैक्सिमस बॉर्नेसिस)। भारतीय हाथी, श्रीलंकाई हाथी और बॉर्नियाई हाथी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और इन्हें संरक्षण की तत्काल जरूरत है। जबकि सुमात्रा के हाथी लुप्तप्राय होने चले हैं और अगर प्रशासन ने इन्हें बचाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए तो ये जल्द ही खत्म हो जाएंगे।

इस ग्राफिक्स तस्वीर के माध्यम से आप हाथियों के प्रकार और उनकी स्थिति को समझ सकते हैं।

मैमथ प्रजाति का हाथी जो लुप्त हो गया।


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हाथी की एक अन्य प्रजाति पर चर्चा होती रही है। इसका नाम है मैमथ। इस प्रजाति के हाथी साइबेरिया के टुंड्रा प्रदेश में रहते थे। इन्हें हिम हाथी भी कहा जाता है। ये अब विलुप्त हो गए हैं। माना जाता है कि हिम युग के समाप्त होने पर ये भोजन की दिशा में उत्तर की तरफ बढ़े होंगे और वहां की दलदली जमीन में भारी शरीर होने की वजह से धंस गए होंगे।

मैमथ प्रजाति के हाथियों का आकार वर्तमान हाथियों के बराबर ही होता था, लेकिन गुणों में वे इनसे सर्वथा अलग थे।

वर्तमान हाथियों के प्रतिकूल मैमथ का शरीर भूरे और काले तथा कई स्थानों पर जमीन तक लंबे बालों से ढँका था, खोपड़ी छोटी और ऊंची, कान छोटे तथा बाहर निकले दांत करीब 14 फुट तक लंबे होते थे। हालांकि, ये दांत कमजोर होते थे।

हाथियों की खासियत है कि ये बिना थके बहुत लंबे समय तक खड़े रह सकते हैं। वास्तव में, अफ़्रीकी हाथियों को शायद ही कभी लेटे हुए देखा जाता हो, सामान्यत: वे बीमार या घायल होने पर ही लेटते है।

इनके विपरीत एशियाई हाथी अक्सर लेटना पसन्द करते हैं।

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