उत्तर प्रदेश के इस गांव में आजादी के 68 साल बाद जला बिजली का बल्ब

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Updated on 25 Jan, 2016 at 10:48 pm

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26 जनवरी, 1950 को ही देश के संविधान को लागू किया गया था। लेकिन सवाल ज़हन में यह उठता है स्वतंत्रता के 68 साल बाद भी क्या देश विकास कर सका है?

राजनीति का कुरुक्षेत्र माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित गांव डिक्का टपरी अब जाकर बिजली पहुंची है। चुनावी वादों से जनता को घेरने वाले नेताओं ने तो इस गांव को अनदेखा ही कर दिया था।

इस गांव में जब पहली बार बल्ब तो लोगों की आंख खुशी से छलछला गई। उन्हें जैसे नया जीवन मिल गया। स्थानीय निवासी भीम सिंह राणा कहते हैंः


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“आज हमें सच्ची आज़ादी मिली है। हम बिजली से चलने वाली चीज़ों से वंचित थे। यहां तक मोबाइल जैसी सुविधा के लिए बगल के गांव जा कर उसे चार्ज करना पड़ता था। अब ज़िंदगी आसान हो गई है।”

हरियाणा के मदद से जब पहली बार रोशन हुआ गांव 

हरियाणा के मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा ने इस गांव में बिजली की शुरुआत की। यह दिन इन गांववासियों के लिए किसी जश्न से कम नहीं था। शायद यह उनकी आज़ादी का दिन था। 68 सालों से उपेक्षा का शिकार यह गांव आज ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाच रहा था।

राणा कहते हैं कि कुछ समय पहले वे सैर करते हुए गांव में आए थे। तब ग्रामीणों ने अपनी समस्या सामने रखी थी। बिजली उपलब्ध न होने की वजह से जो इनके पिछड़ेपन का मर्म था, वह कष्टकारी था। यह गांव हरियाणा की सीमा के नजदीक है।

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच यमुना नदी सीमा रेखा का काम करती है, लेकिन यूपी सरकार यहां बिजली जैसी ज़रूरी सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकी।

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