चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को दी खुली चुनौती, 3 जून से आकर हैक करें ईवीएम

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Updated on 20 May, 2017 at 6:19 pm

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चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से छेड़छाड़ संभव होने के आरोप के चलते राजनीतिक पार्टियों को EVM मशीन को टेम्पर करने की चुनौती दी है।

आपको बता दें कि अभी कुछ महीने पहले ही उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा के नतीजे आने के बाद से ही कई राजनीतिक दल ईवीएम मशीन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे पहले ईवीएम में गड़बड़ी किये जाने का आरोप बसपा प्रमुख मायावती ने लगाया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सहित कई और पार्टियों के नेताओं ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किये थे।

अब चुनाव आयोग ने ईवीएम पर उठते सवालों को खत्म करने के उद्देश्य से ईवीएम को हैक करने की चुनौती की तारीख का ऐलान कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने जानकारी दी कि राजनीतिक पार्टियां 3 जून से ईवीएम हैकिंग की चुनौती में शामिल हो सकेंगी।

ANI

हर राजनीतिक दल को हैकिंग के लिए चार घंटे का वक्त दिया जाएगा। ईवीएम हैकिंग का चैलेंज कोई भी राष्ट्रीय-राज्य स्तर की पार्टी दे सकती है। कोई भी पार्टी अपने तीन प्रतिनिधि को इस चुनौती में शामिल होने लिए भेज सकती है। चुनौती के लिए ये राजनीतिक प्रतिनिधि पांच राज्यों की चार ईवीएम का चुनाव कर सकते हैं। राजनीतिक दलों को साबित करना होगा कि ईवीएम से छेड़खानी कर चुनावी नतीजों को किसी विशेष पार्टी के पक्ष में मोड़ा जा सकता है।



इसके साथ ही नसीम जैदी ने कहा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करना संभव नहीं है।  चुनाव आयुक्त ने ईवीएम से जुड़े उन सिक्यॉरिटी फीचर्स के बारे में जानकारी दी, जिनकी वजह से ईवीएम हैक करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा-

“ईवीएम से अगर कोई छेड़छाड़ की कोशिश करता है, तो मशीनें अपने आप बंद हो जाती हैं। इसके इंटरनल सर्किट में बदलाव नहीं हो सकता। हमारी ईवीएम छेड़छाड़ से मुक्त हैं।”

आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है, जब ईवीएम पर इस तरह से सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे पहले 2009 में खुद बीजेपी ने ही ईवीएम को लेकर धांधली का आरोप लगाया था। 2014 में भी विपक्ष ने ईवीएम के जरिए वोटों की हेराफेरी होने  की संभावना व्यक्त की थी।


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