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दुनिया सीख रही है हाथ से खाना, अब भारत का है जमाना!

7:10 pm 23 Mar, 2018

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भारतीय संस्कृति पुरातनकाल से विकसित और परिष्कृत रही है। यही वजह है कि इसका सदियों तक दुनिया भर में डंका बजता रहा है। यह अलग बात है कि विदेशी आक्रमणकारियों से आक्रांत होने के बाद यहां के लोग धीरे-धीरे आत्मविश्वास खोने लगे। विदेशी सभ्यता का प्रचार हुआ। लोगों को बेहद सुनियोजित तरीके से बताया गया कि भारतीय लोग असभ्य हैं और यहां की जीवनशैली बेकार है। परिणाम यह हुआ कि हम अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को बिसराते हुए पश्चिमी देशों के रंग में रंगते चले गए।

हमारा खान-पान, पहनावा और भाषा तक बदल गई!

हालांकि, अब समय चक्र तेजी से बदल रहा है। यहां के रीति-रिवाज और संस्कृति से अब पश्चिमी देशों के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया अब इस बात को मानती है कि भारतीय संस्कृति प्रकृति के करीब है और बेहद वैज्ञानिक भी है। यह स्वस्थ जीवन शैली हेतु अनुकूल है।

यही कारण है कि अब पश्चिम के देशों के लोग भी भारतीय नक्शे कदम पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। यहां के टोटके पश्चिमी देशों में उत्पाद बनाकर बेचे जा रहे हैं। कुछेक उदाहरण आपको ऐसे दिखते हैं जिनसे सुखद एहसास होता है।


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अक्सर बड़े होटलों या फिर पार्टियों में चम्मच-छूरी से खाते हुए आपको अटपटा लगता होगा। या फिर खुद को ओवर स्मार्ट दिखाने के लिए हम में से ही कुछ लोग दिक्कतों के बावजूद ऐसा करते रहते हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात ये है कि हमारे खान-पान हाथ से ही खाने वाले होते हैं। सभी खाद्यों को चम्मच और छूरी-कांटे से खाना संभव भी नहीं है।

अब विदेशों में लोग हाथ से खाने को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका तर्क है कि ये सेहत के लिए फायदेमंद होता है। बता दें कि न्यूयॉर्क, कैंब्रिज, सेन फ्रैंसिसको के कुछ रेस्त्रां लोगों को हाथ से खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

दरअसल, हाथ की ऊंगलियों और हथेलियों में पाए जाने वाले कुछ जीवाणु खाना पचाने में मदद करते हैं। वहीं हाथ से खाने पर संतुष्टि की भावना बढ़ती है। सिर्फ़ भारत में ही नहीं अफ़्रीकी और मिडल ईस्ट संस्कृतियों में भी हाथ से खाने का रिवाज है। अब आप नक़ल करने की बजाय अपने कम्फर्ट को अहमियत दे सकते हैं।

बड़े शान से ये भी कह सकते हैं कि जो मजा हाथ से खाने में है वो चम्मच, छुरी, कांटे से खाने में कहां?

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