3 दशक से जल रही है मध्यप्रदेश के दुर्गापुरी माता मंदिर की अखंड ज्योति

Updated on 24 Sep, 2017 at 1:50 pm

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भारत को मंदिरों का देश कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। यहां लाखों छोटे-बड़े मंदिर हैं, जो अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित हैं और हर मंदिर का अलग और अनोखा इतिहास है। इन मंदिरों से अलग-अलग मान्यताएं जुड़ी हैं। ऐसा ही एक मंदिर है मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित दुर्गापुरी माता का मंदिर। जंगल के बीच में बने इस पौराणिक मंदिर का इतिहास भी बहुत दिलचस्प है।

लोककथाओं और बड़े-बुज़ुर्गों द्वारा कहे किस्सों के मुताबिक इस मंदिर का इतिहास पांडवों के समय का है। हालांकि, आधुनिक समय में इस मंदिर की खोज करीब 90 साल पहले शिवनारायण पराशर ने की थी, जिन्हें डांगवैल बाबा के नाम से भी जाना जाता था। उस समय एक पेड़ के नीचे देवी मां की मूर्ति मिली थी। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक यह मंदिर उस समय चर्चा में आया जब करीब 30 साल पहले राज्य के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह ने यहां एक भव्य मंदिर बनवाया। उन्होंने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करवाई साथ ही एक अनन्त लौ भी जलाई, जो आज तक जल रही है। मंदिर के दरवाजे पर स्थित तो विशाल शेर की मूर्तियां लागों को आकर्षित करती हैं।


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दुर्गापुरी माता भक्तों की धन और समृद्धि की हर कामना पूर्ण करती हैं। इस मंदिर में श्योपुर जिले के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और देश के अन्य जगहों से भी भक्त आते हैं। नवरात्रि के समय खासतौर पर भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं और इस अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। साथ ही नवरात्रि के सांतवें दिन कालरात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है और इस दिन देवी मां को काले वस्त्र पहनाएं जाते हैं।

इस मंदिर की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेलवे को इसे देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए अपने नेटवर्क में विशेष रूप से शामिल करना पड़ा। अब इस मंदिर के दरवाज़े के सामने ही रेलवे स्टेशन है।

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